बॉन जलवायु सम्मेलन 2026 (Bonn Climate Conference 2026): जलवायु कार्रवाई को गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

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जर्मनी के बॉन शहर में आयोजित बॉन जलवायु सम्मेलन 2026 (Bonn Climate Conference 2026) में जलवायु परिवर्तन से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई। सम्मेलन के दौरान Global Climate and Health Alliance (GCHA) के नेतृत्व में स्वास्थ्य एवं जलवायु क्षेत्र से जुड़े संगठनों ने विकसित देशों से वर्ष 2035 तक अनुकूलन (Adaptation) हेतु सार्वजनिक वित्तपोषण को बढ़ाकर 120 अरब डॉलर प्रतिवर्ष करने की मांग की।

  • यह सम्मेलन संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन रूपरेखा अभिसमय (UNFCCC) के अंतर्गत आयोजित वार्षिक मध्यावधि (Mid-Year) जलवायु वार्ता का हिस्सा है।

क्या है बॉन जलवायु सम्मेलन?

  • बॉन जलवायु सम्मेलन संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन रूपरेखा अभिसमय United Nations Framework Convention on Climate Change के तहत आयोजित होने वाली वार्षिक तकनीकी जलवायु वार्ताओं का मंच है।
  • इसे आधिकारिक रूप से 64वें सहायक निकायों के सत्र (64th Sessions of the Subsidiary Bodies – SB64) के नाम से जाना जाता है।
  • यह सम्मेलन प्रत्येक वर्ष आयोजित होने वाले COP (Conference of Parties) शिखर सम्मेलन से पहले एक तैयारी और तकनीकी वार्ता मंच के रूप में कार्य करता है।
  • वर्ष 2026 का सम्मेलन Bonn में आयोजित किया गया।

उद्देश्य

बॉन जलवायु सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य—

  • Paris Agreement के तहत किए गए वादों के क्रियान्वयन को आगे बढ़ाना।
  • जलवायु अनुकूलन (Adaptation), शमन (Mitigation), जलवायु वित्त (Climate Finance), क्षति एवं हानि (Loss and Damage) तथा न्यायपूर्ण संक्रमण (Just Transition) से जुड़े मुद्दों पर वार्ता करना।
  • आगामी COP सम्मेलन के लिए तकनीकी आधार तैयार करना।
  • वैश्विक जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने हेतु देशों के बीच सहयोग बढ़ाना।

सम्मेलन के प्रमुख मुद्दे एवं चर्चाएँ

1. अनुकूलन वित्त (Adaptation Finance) बढ़ाने की मांग

  • स्वास्थ्य एवं जलवायु संगठनों ने विकसित देशों से आग्रह किया कि वे जलवायु परिवर्तन से प्रभावित देशों की सहायता के लिए सार्वजनिक अनुकूलन वित्त को बढ़ाकर 120 अरब डॉलर प्रतिवर्ष (2035 तक) करें। यह मांग COP26 के दौरान निर्धारित 40 अरब डॉलर प्रतिवर्ष के लक्ष्य से तीन गुना अधिक है।

2. जीवाश्म ईंधन से संक्रमण (Fossil Fuel Transition)

सम्मेलन में विकसित देशों से अपने-अपने राष्ट्रीय रोडमैप प्रस्तुत करने का आग्रह किया गया ताकि वे चरणबद्ध तरीके से—

  • कोयला,
  • तेल,
  • प्राकृतिक गैस

जैसे जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम कर सकें। चर्चाओं में वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5°C तक सीमित रखने के लक्ष्य पर विशेष बल दिया गया।

3. बेलेंम अनुकूलन संकेतक (Belém Adaptation Indicators)

  • COP30 में स्वीकृत 59 Belém Adaptation Indicators को लागू करने के लिए तकनीकी स्तर पर चर्चा प्रारंभ की गई।
  • इन संकेतकों का उद्देश्य यह आकलन करना है कि विभिन्न देश जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति कितने अनुकूलनशील (Climate Resilient) बन रहे हैं।

4. कृषि एवं खाद्य सुरक्षा

सम्मेलन में Sharm el-Sheikh Joint Work on Agriculture and Food Security के अंतर्गत कृषि क्षेत्र को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से सुरक्षित बनाने पर विचार-विमर्श किया गया।

मुख्य उद्देश्य—

  • जलवायु-स्मार्ट कृषि को बढ़ावा देना।
  • खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना।
  • किसानों की अनुकूलन क्षमता को मजबूत बनाना।

5. जस्ट ट्रांजिशन मैकेनिज्म (Just Transition Mechanism)

COP30 में सहमति से स्थापित Just Transition Mechanism को लागू करने पर भी चर्चा हुई।

इसका उद्देश्य—

  • विकासशील देशों की क्षमता निर्माण (Capacity Building) में सहायता करना।
  • तकनीकी सहयोग बढ़ाना।
  • हरित अर्थव्यवस्था की ओर संक्रमण के दौरान रोजगार एवं सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

सम्मेलन का महत्व

1. COP सम्मेलनों के बीच प्रमुख तकनीकी मंचबॉन सम्मेलन राजनीतिक घोषणाओं को व्यावहारिक एवं क्रियान्वयन योग्य योजनाओं में बदलने का कार्य करता है।

2. विकासशील देशों को समर्थनयह सम्मेलन उन देशों के लिए महत्वपूर्ण है जो—

  • जलवायु आपदाओं,
  • स्वास्थ्य जोखिमों,
  • खाद्य असुरक्षा, जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।

3. जलवायु वित्त पर वैश्विक सहमति

यह मंच अनुकूलन वित्त, क्षति एवं हानि कोष (Loss and Damage Fund) तथा हरित निवेश से जुड़े मुद्दों पर वैश्विक सहमति विकसित करने में मदद करता है।

4. पेरिस समझौते के लक्ष्यों की दिशा में प्रगति

सम्मेलन वैश्विक तापमान वृद्धि को नियंत्रित करने तथा नेट-जीरो लक्ष्यों की दिशा में देशों की प्रगति की समीक्षा करता है।

निष्कर्ष

बॉन जलवायु सम्मेलन 2026 वैश्विक जलवायु शासन की प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण कड़ी है। यह सम्मेलन जलवायु वित्त, जीवाश्म ईंधन से संक्रमण, खाद्य सुरक्षा और न्यायपूर्ण हरित विकास जैसे विषयों पर वैश्विक सहयोग को मजबूत करता है। विशेष रूप से विकासशील और जलवायु-संवेदनशील देशों के लिए यह मंच जलवायु न्याय एवं सतत विकास की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।