शिक्षा पर GDP का 6% खर्च करने की सिफारिश, संसदीय समिति ने सरकार को दिया सुझाव

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शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने सरकार से राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के लक्ष्य के अनुरूप शिक्षा पर सार्वजनिक व्यय को सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 6 प्रतिशत तक बढ़ाने की सिफारिश की है। यह सुझाव समिति की 2025-26 के उच्च शिक्षा अनुदानों से संबंधित 381वीं कार्यवाही प्रतिवेदन (Action Taken Report) में दिया गया है।

  • समिति ने उच्च शिक्षा विभाग के लिए किए गए बजटीय आवंटनों की समीक्षा करते हुए पाया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति द्वारा निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए वर्तमान निवेश स्तर पर्याप्त नहीं है।
  • रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2021-22 में शिक्षा पर कुल सार्वजनिक व्यय GDP का केवल 4.12 प्रतिशत था, जो NEP 2020 के निर्धारित 6 प्रतिशत लक्ष्य से काफी कम है।

उच्च शिक्षा बजट में अपेक्षित वृद्धि का अभाव

  • समिति ने यह भी उल्लेख किया कि वर्ष 2025-26 में उच्च शिक्षा के लिए बजट अनुमान (BE) में की गई वृद्धि पिछले वर्ष की तुलना में अपेक्षाकृत कम रही है। समिति का मत है कि शिक्षा क्षेत्र में बढ़ती लागत और मुद्रास्फीति के प्रभाव को देखते हुए बजट में प्रतिवर्ष कम-से-कम 8 से 10 प्रतिशत की वृद्धि सुनिश्चित की जानी चाहिए।

GER में सीमित प्रगति

  • रिपोर्ट में उच्च शिक्षा के सकल नामांकन अनुपात (Gross Enrolment Ratio-GER) को लेकर चिंता व्यक्त की गई है। समिति के अनुसार, 2018 से 2023 के बीच पुरुष एवं महिला दोनों वर्गों में GER की वृद्धि अपेक्षाकृत धीमी रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति का लक्ष्य वर्ष 2035 तक उच्च शिक्षा में GER को 50 प्रतिशत तक पहुंचाना है, जिसके लिए पर्याप्त वित्तीय निवेश आवश्यक है।

अंतरराष्ट्रीय तुलना में भारत पीछे

  • समिति ने पड़ोसी देशों के उदाहरण देते हुए कहा कि शिक्षा पर सार्वजनिक निवेश बढ़ाने की आवश्यकता है। रिपोर्ट के अनुसार, भूटान अपनी GDP का लगभग 7.47 प्रतिशत तथा मालदीव 4.67 प्रतिशत शिक्षा पर व्यय करता है, जबकि भारत का व्यय अभी भी अपेक्षाकृत कम है।

शिक्षा निवेश का व्यापक महत्व

  • विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा पर अधिक निवेश से सीखने के परिणामों में सुधार, अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा, डिजिटल शिक्षा का विस्तार तथा मानव संसाधन की गुणवत्ता में वृद्धि होती है। इसके अतिरिक्त, बेहतर शिक्षा प्रणाली रोजगार क्षमता, कौशल विकास और आर्थिक प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत बनाती है।
  • समिति ने जोर देकर कहा कि यदि भारत को ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था और विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ना है, तो शिक्षा क्षेत्र में निवेश को प्राथमिकता देना अनिवार्य होगा।

निष्कर्ष

  • संसदीय समिति की यह सिफारिश राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। शिक्षा पर GDP का 6 प्रतिशत व्यय न केवल उच्च शिक्षा के विस्तार में सहायक होगा, बल्कि देश की दीर्घकालिक आर्थिक एवं सामाजिक प्रगति को भी गति प्रदान करेगा।