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भारत ने पिछले एक दशक में रक्षा क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन दर्ज किया है। प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) द्वारा जारी पृष्ठभूमि रिपोर्ट “The Defence Decade: Enhanced Capability, Greater Capacity, and Stronger Credibility” के अनुसार वर्ष 2014 से 2026 के बीच देश ने विदेशी रक्षा उपकरणों के बड़े आयातक से आत्मनिर्भर रक्षा विनिर्माण शक्ति बनने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है।
आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया की अवधारणा के तहत रक्षा मंत्रालय ने रक्षा उत्पादन, अनुसंधान, नवाचार तथा निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कई संरचनात्मक सुधार लागू किए हैं। परिणामस्वरूप भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता, निर्यात क्षमता और सामरिक विश्वसनीयता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
रक्षा बजट में ऐतिहासिक वृद्धि
- वर्ष 2013-14 में भारत का रक्षा बजट ₹2.53 लाख करोड़ था, जो 2026-27 में बढ़कर ₹7.85 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। इसी अवधि में पूंजीगत व्यय ₹94,588 करोड़ से बढ़कर ₹2.19 लाख करोड़ हो गया, जबकि रक्षा अनुसंधान एवं विकास (R&D) पर व्यय ₹13,716 करोड़ से बढ़कर ₹29,100 करोड़ तक पहुंच गया है।
स्वदेशी रक्षा उत्पादन को मिला बल
- रिपोर्ट के अनुसार, भारत में स्वदेशी रक्षा उत्पादन का मूल्य 2014-15 के ₹46,429 करोड़ से बढ़कर 2025-26 में ₹1.78 लाख करोड़ हो गया है। वर्तमान में कुल रक्षा उत्पादन में रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों (DPSUs) का योगदान 76 प्रतिशत तथा निजी क्षेत्र का योगदान 24 प्रतिशत है।
- रक्षा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए जारी लाइसेंसों की संख्या 2015 के 258 से बढ़कर 2026 में 834 हो गई है। इसके अतिरिक्त, 2021 में 200 वर्ष पुराने ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड (OFB) का पुनर्गठन कर सात नए रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों का गठन किया गया।
रक्षा निर्यात में 5500 प्रतिशत की वृद्धि
- भारत की रक्षा निर्यात क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2013-14 में मात्र ₹686 करोड़ का रक्षा निर्यात करने वाला भारत 2025-26 में ₹38,424 करोड़ के निर्यात स्तर तक पहुंच गया है। वर्तमान में भारत 80 से अधिक देशों को रक्षा उपकरण एवं सैन्य प्रणालियां निर्यात कर रहा है तथा 145 भारतीय कंपनियां वैश्विक रक्षा आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा बन चुकी हैं।
आयात निर्भरता में कमी
- जहां पहले भारत अपनी रक्षा आवश्यकताओं का लगभग 65 से 70 प्रतिशत हिस्सा आयात करता था, वहीं अब लगभग 65 प्रतिशत रक्षा उपकरणों का निर्माण देश के भीतर किया जा रहा है। यह परिवर्तन भारत की सामरिक आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
नवाचार और तकनीकी उपलब्धियां
- रक्षा क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए Innovations for Defence Excellence (iDEX) कार्यक्रम के तहत 551 अनुबंध किए गए हैं। वहीं सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची (Positive Indigenisation Lists) के माध्यम से 5,012 रक्षा वस्तुओं के आयात पर रोक लगाई गई है।
- तकनीकी उपलब्धियों में 2019 का मिशन शक्ति (ASAT परीक्षण), 2024 का मिशन दिव्यास्त्र (MIRV तकनीक), 2026 में हाइपरसोनिक स्क्रैमजेट इंजन परीक्षण तथा प्रोजेक्ट-75 के तहत सभी छह कलवरी श्रेणी की पनडुब्बियों की डिलीवरी प्रमुख हैं।
रक्षा औद्योगिक गलियारों का विकास
- उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में स्थापित रक्षा औद्योगिक गलियारों ने निवेश आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उत्तर प्रदेश रक्षा गलियारे में ₹42,057 करोड़ तथा तमिलनाडु रक्षा गलियारे में ₹32,699 करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।
चुनौतियां और आगे की राह
- हालांकि रक्षा क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है, फिर भी तकनीकी हस्तांतरण, उच्च कौशलयुक्त मानव संसाधन की कमी, DRDO तकनीकों का बड़े पैमाने पर व्यावसायीकरण तथा राज्यों में परियोजनाओं के अनुमोदन जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं।
- सरकार ने वर्ष 2029 तक रक्षा निर्यात को ₹50,000 करोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। साथ ही, रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (DAP-2026) के माध्यम से रक्षा खरीद में न्यूनतम 60 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री सुनिश्चित करने की योजना है।
निष्कर्ष
पिछले एक दशक में भारत ने रक्षा क्षेत्र में केवल उत्पादन क्षमता ही नहीं बढ़ाई है, बल्कि आत्मनिर्भरता, नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा की दिशा में भी मजबूत कदम बढ़ाए हैं। रक्षा क्षेत्र में यह परिवर्तन भारत को एक उभरती हुई वैश्विक रक्षा शक्ति तथा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण सुरक्षा प्रदाता के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
