भारत का पहला SkyCast System: IGI एयरपोर्ट पर लॉन्च — धुंध से मुक्त होगा भारतीय आसमान

Mission Mausam के तहत MoES ने विकसित किया अत्याधुनिक वायुमंडलीय रिमोट सेंसिंग सिस्टम — केवल 19 देशों के पास है यह तकनीक

Download : 31st & 1st June ‘s Daily Current Affairs Analysis

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGI) पर भारत के पहले ‘SkyCast’ System का उद्घाटन किया। यह एक अभूतपूर्व उपलब्धि है जो भारतीय विमानन के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ती है। इस प्रणाली के साथ भारत उन चुनिंदा 19 देशों की सूची में शामिल हो गया है जिनके पास इस स्तर की उच्च तकनीकी विमानन मौसम बुनियादी ढांचा क्षमता है।

SkyCast System क्या है?

  • SkyCast एक अगली पीढ़ी का, एकीकृत वायुमंडलीय रिमोट सेंसिंग सिस्टम है जिसे विमानन मौसम निगरानी के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया है। यह धुंध, एरोसोल, टर्बुलेंस, नमी और दृश्यता के कई real-time मापों को एक ही व्यापक विमानन मौसम बुद्धिमत्ता ढांचे में एकीकृत करता है।
  • विकसित किया किसने: यह प्रणाली पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES) द्वारा भारत सरकार की Mission Mausam पहल के तहत विकसित की गई है।

उद्देश्य

  • SkyCast का प्राथमिक लक्ष्य भारत को fog-free, weather-smart aviation के युग में ले जाना है। यह प्रतिकूल मौसम की स्थिति के कारण होने वाली उड़ान देरी, रद्दीकरण और विचलन को नाटकीय रूप से कम करेगा — साथ ही टेकऑफ और लैंडिंग के महत्वपूर्ण चरणों के दौरान सुरक्षा को अधिकतम करेगा।
  • दिल्ली जैसे शहरों में सर्दियों की घनी धुंध के कारण प्रतिवर्ष सैकड़ों उड़ानें प्रभावित होती हैं — SkyCast इस समस्या का एक तकनीकी समाधान है।

प्रमुख विशेषताएं

  • बहु-सेंसर एकीकरण: यह प्रणाली कई अत्याधुनिक उपकरणों को एक साथ जोड़ती है —
  • Radar Wind Profiler — ऊपरी वायुमंडल में पवन प्रोफाइल मापने के लिए। SODAR (Sound Detection and Ranging) — ध्वनि तरंगों से निचले वायुमंडल की गतिशीलता मापने के लिए। Microwave Radiometer — तापमान और आर्द्रता प्रोफाइल के लिए। Ground-based Fog Aerosol Spectrometer (GFAS) — धुंध की बूंदों का आकार और एरोसोल-धुंध अंतःक्रिया मापने के लिए। CL61 Lidar-based Ceilometer — धुंध की ऊर्ध्वाधर संरचना और घनत्व को ट्रैक करने के लिए।
  • 3 किलोमीटर वायुमंडलीय निगरानी: यह प्रणाली लगभग 3 किमी की ऊंचाई तक boundary-layer dynamics, पवन गति, पवन दिशा, ऊर्ध्वाधर वेग और टर्बुलेंस की निरंतर निगरानी और मानचित्रण करती है।
  • सूक्ष्म स्तर पर धुंध ट्रैकिंग: GFAS दिल्ली की प्रदूषण-भारी धुंध के लिए बूंद आकार और एरोसोल-धुंध अंतःक्रिया का अध्ययन करता है। Lidar Ceilometer धुंध की ऊर्ध्वाधर संरचना और घनत्व को ट्रैक करता है।
  • 3 घंटे की सटीक चेतावनी: यह प्रणाली एयरक्रू और पायलटों को केवल 3 घंटे की विंडो में सटीक nowcasting और real-time अलर्ट प्रदान करती है।
  • डेटा-संचालित स्केलेबिलिटी: तापमान, आर्द्रता और पवन के ऊर्ध्वाधर प्रोफाइल सीधे उन्नत forecasting models, AI-enabled decision support systems और शहरी प्रदूषण प्रबंधन में फीड होंगे।

महत्व

  • वैश्विक उपलब्धि: इस प्रणाली को तैनात करके भारत उन केवल 19 देशों के विशिष्ट समूह में शामिल हो गया है जिनके पास ऐसा उच्च-तकनीकी विमानन मौसम बुनियादी ढांचा है।
  • विमानन दक्षता और सुरक्षा: उतरान के दौरान पायलटों को real-time boundary-layer data देकर यह एयरलाइंस को लैंडिंग का सटीक समय निर्धारित करने में सक्षम बनाता है — जिससे अचानक विचलन से होने वाले करोड़ों रुपये के परिचालन लागत की बचत होती है।
  • Mission Mausam की सफलता: यह प्रणाली MoES के Mission Mausam की एक बड़ी उपलब्धि है — जो भारत की मौसम पूर्वानुमान और संबंधित तकनीकी क्षमता को वैश्विक स्तर पर स्थापित करती है।

स्रोत: PIB | पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय | Mission Mausam