केंद्रीय गृह मंत्रालय ने असामान्य जनसंख्या परिवर्तनों की व्यापक जांच के लिए बहु-विषयक पैनल का गठन किया
केंद्रीय गृह मंत्री ने भारत भर में असामान्य जनसांख्यिकीय बदलावों से उत्पन्न जटिल चुनौतियों से निपटने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति के गठन की घोषणा की है। यह समिति अवैध आव्रजन और असाधारण जनसंख्या परिवर्तनों की जांच के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा स्थापित एक विशेष, बहु-विषयक केंद्रीय पैनल है।
समिति की संरचना
- अध्यक्ष: न्यायमूर्ति प्रकाश प्रभाकर नाओलेकर — भारत के सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश।
- प्रमुख सदस्य:
भारत के Census Commissioner इस समिति के सदस्य हैं। इसके अतिरिक्त पूर्व IAS अधिकारी दुर्गा शंकर मिश्रा, पूर्व IPS अधिकारी बालाजी श्रीवास्तव और अर्थशास्त्री शमिका रवि भी इस पैनल में शामिल हैं।
- Member Secretary: गृह मंत्रालय में Joint Secretary (Foreigners-I)।
समिति के उद्देश्य
इस उच्च स्तरीय पैनल के दो प्रमुख उद्देश्य हैं —
- पहला, दीर्घकालिक अवैध आव्रजन और घुसपैठ के कारण भारत के विभिन्न क्षेत्रों में हो रहे असामान्य जनसांख्यिकीय बदलावों का एक व्यापक और अनुभवजन्य (empirical) आकलन करना।
- दूसरा, विभिन्न धार्मिक और सामाजिक समुदायों में असामान्य जनसंख्या भिन्नताओं के आंतरिक पैटर्न का गणितीय विश्लेषण कर क्षेत्रीय जनसांख्यिकी को स्थिर करने के लिए एक संरचित और time-bound समाधान तैयार करना।
समिति की प्रमुख विशेषताएं
- प्रधानमंत्री के आदेश से उत्पत्ति: इस उच्च स्तरीय पैनल की संस्थागत रूपरेखा सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लाल किले से दिए गए स्वतंत्रता दिवस भाषण में घोषित आधिकारिक नीतिगत इरादे से उपजी है।
- व्यापक जांच का दायरा: समिति को field data एकत्र करने, border-fringe migration patterns को track करने और जिला एवं गांव स्तर तक ऐतिहासिक जनगणना भिन्नताओं की समीक्षा करने का कानूनी अधिकार प्राप्त है।
- समुदाय-केंद्रित दृष्टिकोण: यह पैनल व्यापक राष्ट्रीय औसत के बजाय स्थानीय, तेज़ सामुदायिक बदलावों पर ध्यान केंद्रित करेगा — विशेषकर उन clusters की पहचान करने के लिए जहाँ undocumented जनसंख्या वृद्धि की दर असामान्य रूप से अधिक है।
- Time-Bound कार्ययोजना: समिति को एक कड़ी, पूर्व-निर्धारित समयसीमा के भीतर अपना शोध पूरा करना होगा। इसका परिणाम एक blueprint report के रूप में सामने आएगा जिसमें नीतिगत बदलाव, border-control संबंधी सिफारिशें और data tracking पद्धतियां शामिल होंगी।
समिति का महत्व
- राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा: यह समिति अवैध सीमा पार करने की घटनाओं पर अंकुश लगाने में मदद करेगी जो मतदाता सूचियों, संसाधन वितरण और सीमावर्ती क्षेत्रों की आंतरिक सुरक्षा को प्रभावित कर सकती हैं।
- जनजातीय पहचान की सुरक्षा: समिति के निष्कर्ष झारखंड और पूर्वोत्तर जैसे क्षेत्रों में जनजातीय समुदायों को जनसांख्यिकीय असंतुलन, भूमि अतिक्रमण और सांस्कृतिक क्षरण से बचाने में सहायक होंगे।
Prelims के लिए मुख्य तथ्य
- समिति का नाम Justice Prakash Prabhakar Naolekar Committee है।
- इसके अध्यक्ष सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति प्रकाश प्रभाकर नाओलेकर हैं। यह गृह मंत्रालय (MHA) के अंतर्गत गठित की गई है।
- इसका Member Secretary Joint Secretary (Foreigners-I), MHA है।
- समिति का mandate अवैध आव्रजन और असामान्य जनसांख्यिकीय बदलावों की जांच करना है। इसकी उत्पत्ति प्रधानमंत्री के Independence Day भाषण से हुई।
स्रोत: News on Air | गृह मंत्रालय, भारत सरकार
| Question based on the Topic | |
| Mains question | Prelims Question |
| Question: Justice Naolekar Committee के उद्देश्यों, संरचना और कार्यक्षेत्र की विवेचना कीजिए। राष्ट्रीय सुरक्षा एवं जनजातीय समुदायों की सुरक्षा में इसके अपेक्षित योगदान का विश्लेषण कीजिए। | 5. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: Justice Naolekar Committee का गठन केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा किया गया है। इस समिति के अध्यक्ष Justice Prakash Prabhakar Naolekar हैं जो उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश हैं। समिति का Member Secretary, Joint Secretary (Foreigners-I), MHA है। इस समिति में Census Commissioner of India भी एक सदस्य हैं। उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं? (a) केवल एक (b) केवल दो (c) केवल तीन (d) सभी चार उत्तर: (c) केवल तीन (कथन 2 गलत है — Justice Naolekar सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के पूर्व न्यायाधीश हैं, न कि उच्च न्यायालय के। कथन 1, 3 और 4 सही हैं।) |
