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डीजल इंजन की जगह लेगी यह eco-friendly ट्रेन — उत्सर्जन शून्य, प्रदूषण शून्य
भारतीय रेलवे ने एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए देश की पहली स्वदेशी 10-डिब्बों वाली हाइड्रोजन फ्यूल सेल आधारित ट्रेन को हरियाणा के जींद-सोनीपत रेल खंड पर परिचालन के लिए औपचारिक मंजूरी दे दी है। यह ट्रेन उन गैर-विद्युतीकृत रूटों पर डीजल इंजनों की जगह लेगी जहां अभी तक पर्यावरण प्रदूषण एक बड़ी चुनौती रही है। इस ट्रेन का एकमात्र उत्सर्जन होगा — स्वच्छ जलवाष्प।
यह ट्रेन क्या है?
- यह एक अत्याधुनिक, 10-डिब्बों वाली eco-friendly यात्री ट्रेन है जो पूरी तरह से ऑनबोर्ड हाइड्रोजन फ्यूल सेल प्रणोदन प्रणाली (Hydrogen Fuel Cell Propulsion System) द्वारा संचालित होती है। इसे भारतीय रेलवे के प्रमुख अनुसंधान एवं मानक निकाय Research Designs and Standards Organisation (RDSO) द्वारा विकसित किया गया है।
- यह ट्रेन किसी भी पारंपरिक ईंधन को नहीं जलाती। इसकी पूरी ऊर्जा एक रासायनिक प्रक्रिया से आती है और यही इसकी सबसे बड़ी खूबी है।
यह काम कैसे करती है?
- रासायनिक ऊर्जा उत्पादन: ट्रेन पारंपरिक इंजन की तरह ईंधन नहीं जलाती। इसके बजाय, ऑनबोर्ड संपीड़ित हाइड्रोजन गैस को एक विशेष फ्यूल सेल स्टैक में बाहर की हवा से ली गई ऑक्सीजन के साथ मिलाया जाता है।
- विद्युत रासायनिक रूपांतरण: इन गैसों को एक आंतरिक झिल्ली (Membrane) से गुजारा जाता है जिसमें हाइड्रोजन और ऑक्सीजन परमाणुओं के संयोजन से निरंतर विद्युत ऊर्जा उत्पन्न होती है।
- प्रणोदन: यह विद्युत सीधे 1,200 KW के हेवी-ड्यूटी प्रणोदन इंजन को दी जाती है जो ट्रेन के पहियों को चलाती है और ऑनबोर्ड इलेक्ट्रॉनिक्स को ऊर्जा देती है।
- शून्य प्रदूषण उत्सर्जन: चूंकि कोई जीवाश्म ईंधन उपयोग नहीं होता, इसलिए रासायनिक प्रतिक्रिया के बाद वातावरण में कोई कार्बन उत्सर्जन नहीं होता — केवल स्वच्छ जलवाष्प निकलती है।
प्रमुख विशेषताएं
- पायलट रूट: हरियाणा का जींद-सोनीपत रेल खंड विशेष रूप से राष्ट्रीय पायलट परीक्षण आधार के रूप में चुना गया है।
- 1,200 KW प्रणोदन इंजन: यह शक्तिशाली फ्यूल सेल प्रणाली क्षेत्रीय नेटवर्क पर लगातार यात्री भार वहन करने के लिए अभियंत्रित की गई है।
- अधिकतम गति: प्रारंभिक परिचालन चरण में अधिकतम सुरक्षित परिचालन गति 75 kmph रखी गई है।
- स्वदेशी रिफ्यूलिंग हब: जींद स्टेशन पर ही स्थानीय, विशेष हाइड्रोजन संपीड़न और रिफ्यूलिंग बुनियादी ढांचा स्थापित किया जाएगा।
- अतिरेक संपीड़न प्रणाली: मानक हाइड्रोजन संपीड़न इकाइयों के साथ-साथ एक standby compressor unit भी लगाई जाएगी ताकि निरंतर ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित रहे।
- बहु-स्तरीय उन्नत सुरक्षा ग्रिड: उत्पादन और वितरण लाइनों पर स्वचालित सुरक्षा सेंसर लगाए गए हैं जिनमें high-sensitivity हाइड्रोजन लीक डिटेक्टर और फ्लेम डिटेक्टर शामिल हैं।
- शकूरबस्ती रखरखाव केंद्र: शकूरबस्ती में एक समर्पित रखरखाव कार्यशाला स्थापित की जाएगी जो RDSO-अनुमोदित मानक परिचालन प्रक्रियाओं और नियमित सुरक्षा ऑडिट के तहत कार्य करेगी।
- 24/7 निगरानी: रिफ्यूलिंग ग्रिड की चौबीसों घंटे निगरानी प्रमाणित टीमों द्वारा की जाएगी और प्रारंभिक चरणों में तकनीकी कर्मचारी ट्रेन में सवार रहेंगे।
महत्व
भारत की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन कई मायनों में ऐतिहासिक है। पर्यावरण की दृष्टि से यह गैर-विद्युतीकृत रूटों पर डीजल के विकल्प के रूप में भारतीय रेलवे के Net Zero Carbon Emission लक्ष्य की दिशा में एक बड़ा कदम है। तकनीक की दृष्टि से RDSO द्वारा स्वदेशी विकास ‘Make in India’ और ‘Atmanirbhar Bharat’ की भावना को मजबूत करता है। रणनीतिक दृष्टि से जींद-सोनीपत रूट की सफलता भविष्य में देश के अन्य गैर-विद्युतीकृत रेल खंडों पर हाइड्रोजन ट्रेन के विस्तार का मार्ग प्रशस्त करेगी।
स्रोत: Times of India | भारतीय रेलवे | RDSO
| Question based on the Topic | |
| Mains question | Prelims Question |
| प्रश्न: भारतीय रेलवे द्वारा हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन के परिचालन की स्वीकृति के संदर्भ में इस तकनीक की कार्यप्रणाली, लाभ और चुनौतियों का परीक्षण कीजिए। (250 शब्द | 15 अंक) | Q2. निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: विशेषता विवरण 1. विकासकर्ता RDSO 2. पायलट रूट अंबाला-लुधियाना, पंजाब 3. प्रणोदन शक्ति 1,200 KW 4. अधिकतम गति 110 kmph 5. रखरखाव केंद्र शकूरबस्ती उपर्युक्त में से कितने युग्म सही सुमेलित हैं? (a) केवल दो (b) केवल तीन (c) केवल चार (d) सभी पाँच उत्तर: (b) केवल तीन व्याख्या: युग्म 1 सही है — RDSO ने इसे विकसित किया। युग्म 2 गलत है — पायलट रूट जींद-सोनीपत, हरियाणा है, न कि अंबाला-लुधियाना। युग्म 3 सही है — 1,200 KW प्रणोदन इंजन। युग्म 4 गलत है — अधिकतम गति 75 kmph है, 110 kmph नहीं। युग्म 5 सही है — शकूरबस्ती में रखरखाव कार्यशाला। |
