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| राष्ट्रीय मह:त्व की समसामयिक घटनाएँभूगोल एवं पर्यावरण | GS Paper 3: आपदा प्रवंधन |
| टॉपिक के संभावित मुख्य परीक्षा प्रश्न – आपदा प्रतिरोधी अवसंरचना (Disaster Resilient Infrastructure) का अर्थ स्पष्ट कीजिए। भारत के लिए इसकी आवश्यकता क्यों बढ़ गई है?“जलवायु परिवर्तन भारत की अवसंरचना और सार्वजनिक वित्त के लिए बड़ा जोखिम बन गया है।” विवेचना कीजिए।राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (NIP) में आपदा प्रतिरोध क्षमता को मुख्यधारा में शामिल करने के लाभ बताइए। | |
आपदा प्रतिरोध क्षमता को अवसंरचना परियोजनाओं में मुख्यधारा में लाना
संदर्भ
- भारत अपने 4.51 ट्रिलियन डॉलर के National Infrastructure Pipeline (NIP) को जलवायु जोखिमों से बचाने हेतु Disaster Resilience को मुख्यधारा में ला रहा है।
- आपदाओं से भारत को GDP का लगभग 2% वार्षिक नुकसान होता है।

रिपोर्ट के बारे में
- यह रिपोर्ट CDRI द्वारा तैयार की गई है।
- इसे DEA और वित्त मंत्रालय के सहयोग से विकसित किया गया।
- उद्देश्य: Climate Risk Assessment और Resilience उपायों को NIP में शामिल करना।
- फोकस सेक्टर: सड़क, बिजली, रेल।
प्रमुख निष्कर्ष
- औसतन 31.59 बिलियन डॉलर/वर्ष अवसंरचना नुकसान।
- आपदाओं से सरकारी राजस्व में 12% तक गिरावट संभव।
- GDP में 2% तक वार्षिक कमी की संभावना।
- सड़क, बिजली और रेल सबसे अधिक संवेदनशील।
- RCBA टूल से निवेश पर 12 गुना तक रिटर्न पाया गया।
- वर्तमान वित्तीय तंत्र राहत पर केंद्रित, पुनर्निर्माण पर नहीं।
आपदा प्रतिरोध की आवश्यकता
- सार्वजनिक वित्त को राजकोषीय झटकों से बचाना।
- अवसंरचना की दीर्घायु और संचालन निरंतरता सुनिश्चित करना।
- सेवा बाधा कम करना (बिजली/परिवहन)।
- वैश्विक जलवायु वित्त तक पहुंच बढ़ाना।
प्रमुख चुनौतियाँ
- प्रारंभिक लागत में 10–20% वृद्धि।
- डेटा और बीमा प्रणाली कमजोर।
- वित्तीय अंतर और प्रतिक्रियात्मक नीति दृष्टिकोण।
सिफारिशें
- सभी परियोजनाओं में RCBA आधारित जोखिम मूल्यांकन।
- PPP/EPC अनुबंधों में जोखिम-साझाकरण प्रावधान।
- Force Majeure को मापनीय आपदा सीमा से जोड़ना।
- संप्रभु समर्थित Risk Pool/Resilience Fund बनाना।
निष्कर्ष
- आपदा प्रतिरोध क्षमता (Disaster Resilience) अब विकल्प नहीं, बल्कि आर्थिक स्थिरता व सतत विकास की अनिवार्यता है।
- आपदा प्रतिरोध क्षमता को योजना, वित्त और अनुबंधों में शामिल करना भारत के लिए अब रणनीतिक आवश्यकता है।
- जलवायु आपदाएँ अवसंरचना को नुकसान पहुँचाकर विकास कार्यों और सार्वजनिक वित्त दोनों पर दबाव बढ़ाती हैं।
- इसलिए जोखिम आकलन, लचीलापन निवेश और बीमा/जोखिम-साझाकरण अपनाकर भारत आर्थिक स्थिरता, सतत विकास और 2047 लक्ष्य सुनिश्चित कर सकता है।

