कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने Companies Act, 2013 की Schedule VII में किया संशोधन — Social Stock Exchange को मिला नया बल
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कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने Companies Act, 2013 की Schedule VII के दायरे का विस्तार करते हुए कंपनियों को Zero Coupon Zero Principal (ZCZP) Instrument के माध्यम से अपनी Corporate Social Responsibility (CSR) की बाध्यताओं को पूरा करने में सक्षम बना दिया है। यह निर्णय भारत के Social Stock Exchange को मजबूत करने और CSR funds को सामाजिक प्रभाव वाली परियोजनाओं की ओर अधिक प्रभावी ढंग से channelize करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
ZCZP Instrument क्या है?
- ZCZP Instrument एक SEBI-regulated fundraising instrument है जिसे Social Stock Exchange पर सूचीबद्ध not-for-profit organizations द्वारा योग्य सामाजिक परियोजनाओं के लिए जारी किया जाता है।
- यह instrument पारंपरिक stocks या bonds से मौलिक रूप से अलग है — इस पर न तो कोई ब्याज (coupon) मिलता है और न ही मूलधन की वापसी (principal repayment) होती है। निवेशक वित्तीय रिटर्न की अपेक्षा किए बिना measurable social impact उत्पन्न करने के उद्देश्य से funds का योगदान करते हैं।
- 10% की सीमा: किसी कंपनी का ZCZP instruments में निवेश उस विशेष वित्तीय वर्ष के उसके कुल CSR व्यय के 10% से अधिक नहीं हो सकता।
CSR के बारे में
- कानूनी प्रावधान: CSR भारत में Companies Act, 2013 की धारा 135 के तहत कुछ निश्चित कंपनियों के लिए एक अनिवार्य आवश्यकता है। यह उन्हें देश के सामाजिक, पर्यावरणीय और आर्थिक विकास में योगदान देने वाली गतिविधियां करने के लिए बाध्य करती है।
- Fund Allocation: कंपनियां पिछले तीन वर्षों के औसत शुद्ध लाभ का कम से कम 2% CSR गतिविधियों पर खर्च करने के लिए बाध्य हैं।
- Schedule VII: Companies Act की Schedule VII उन गतिविधियों की सूची बताती है जिन्हें CSR के रूप में किया जा सकता है। अब इसमें ZCZP Instrument में निवेश को भी शामिल कर लिया गया है।
महत्व
- Social Stock Exchange को बल: ZCZP Instrument की CSR में स्वीकार्यता Social Stock Exchange के लिए एक बड़ा प्रोत्साहन है। अब कॉर्पोरेट जगत की CSR funds सीधे SEBI-regulated, measurable सामाजिक परियोजनाओं तक पहुंच सकती है।
- पारदर्शिता और जवाबदेही: चूंकि ये instruments SEBI द्वारा regulated हैं, इसलिए निवेशित funds का उपयोग और सामाजिक प्रभाव दोनों की measurable और transparent reporting होगी — जो पारंपरिक CSR spending में अक्सर अनुपस्थित रहती है।
- नवाचारी वित्तपोषण मॉडल: यह instrument दर्शाता है कि सामाजिक बदलाव के लिए पूंजी जुटाने के नए रास्ते खोजे जा सकते हैं जहां निवेशक वित्तीय लाभ के बजाय सामाजिक लाभ को प्राथमिकता देते हैं।
- 10% की सीमा का औचित्य: यह सीमा यह सुनिश्चित करती है कि कंपनियां अपनी CSR obligations को पूरी तरह ZCZP में shift न कर दें — बल्कि यह एक supplementary माध्यम के रूप में काम करे।
स्रोत: Ministry of Corporate Affairs | SEBI | Companies Act, 2013
