PRL अहमदाबाद के वैज्ञानिकों ने Chandrayaan-2 के DFSAR से की ऐतिहासिक खोज — Faustini क्रेटर में मिले ठोस प्रमाण
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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि में, अहमदाबाद के Physical Research Laboratory (PRL) के वैज्ञानिकों ने Chandrayaan-2 के Dual Frequency Synthetic Aperture Radar (DFSAR) से प्राप्त अवलोकनों का उपयोग करके चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में भूमिगत जल-बर्फ के साक्ष्य खोजे हैं। यह खोज चंद्रमा पर भविष्य के मानव मिशनों और दीर्घकालिक उपस्थिति की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
DFSAR क्या है?
Dual Frequency Synthetic Aperture Radar (DFSAR) Chandrayaan-2 lunar orbiter पर सक्रिय एक अत्याधुनिक microwave imaging instrument है। यह चंद्र सतह का अध्ययन करने के लिए अब तक तैनात किया गया पहला पूर्णतः polarimetric Synthetic Aperture Radar (SAR) है — जो इसे तकनीकी रूप से अद्वितीय बनाता है।
उद्देश्य: DFSAR का प्राथमिक उद्देश्य चंद्र स्थलाकृति, सतह की खुरदरापन और भूमिगत सामग्री संरचना का मानचित्रण और जांच करना है। विशेष रूप से यह ध्रुवों पर Permanently Shadowed Regions (PSRs) और doubly shadowed craters की खोज करता है ताकि जल-बर्फ जैसी volatiles की पहचान, मात्रा निर्धारण और मानचित्रण किया जा सके — जो चंद्रमा पर दीर्घकालिक मानव अस्तित्व और ईंधन उत्पादन के लिए अनिवार्य हैं।
यह काम कैसे करता है?
DFSAR प्रकाश पर निर्भर optical cameras के विपरीत, अपने स्वयं के microwave signals उत्सर्जित करके और वापस आने वाली echoes को सुनकर चंद्रमा का मानचित्रण करता है —
- सिग्नल प्रवेश: Radar L-band और S-band microwave radio frequencies प्रसारित करता है। ये लंबी तरंगदैर्ध्य सतह की धूल की ऊपरी परत से सीधे गुजरकर छिपी हुई भूमिगत सामग्री के साथ अंतःक्रिया करती हैं।
- आयतनिक परावर्तन: जब तरंगें भूमिगत बर्फ से टकराती हैं तो वे आंतरिक रूप से उछलती हैं — इसे volumetric scattering कहते हैं। यह orbiter पर वापस परावर्तित होने से पहले तरंग गुणों को बदल देता है।
- Polarimetric Profiling: instrument वापस आई echo के दो महत्वपूर्ण गुण मापता है — Circular Polarization Ratio (CPR) और Degree of Polarization (DOP)। DOP मापता है कि परावर्तित सिग्नल का कितना हिस्सा टकराने के बाद अपनी मूल polarization अवस्था बनाए रखता है।
- Signature Separation: चट्टानी भू-भाग signals को बिखेरकर आसानी से बर्फ की नकल कर सकते हैं। DFSAR वास्तविक जल-बर्फ को उन क्षेत्रों के लिए filtering करके अलग करता है जहां उच्च CPR (CPR > 1) एक अत्यंत कम DOP (DOP < 0.13) से मेल खाता है — जो भूमिगत volatiles के मानचित्रण के लिए अत्यधिक परिष्कृत blueprint प्रदान करता है।
DFSAR की प्रमुख विशेषताएं
- Dual-Frequency बहुमुखिता: L-band और S-band दोनों frequencies पर कार्य करता है जिससे भूमिगत penetration की अलग-अलग गहराई और उच्च-रिज़ॉल्यूशन imaging क्षमता मिलती है।
- पूर्ण Polarimetric Matrix: एक साथ complete polarimetric radar returns एकत्र करता है जिससे वैज्ञानिकों को भूमिगत लक्ष्यों की भौतिक ज्यामिति और अभिविन्यास स्पष्ट रूप से दिखता है।
- Non-Line-of-Sight Imaging: पूरी तरह सौर प्रकाश से स्वतंत्र — अरबों वर्षों से अंधेरे में जमे हुए dark craters के अंदर देखने में सक्षम।
- उच्च-कंट्रास्ट Resolution Mapping: बारीक चंद्र मिट्टी (regolith), नुकीले पत्थरों और embedded ice blocks के बीच सूक्ष्म अंतर को अलग करने के लिए विस्तृत, उच्च-कंट्रास्ट radar maps तैयार करने में सक्षम।
हाल की खोजें
- भूमिगत ध्रुवीय बर्फ की पुष्टि: चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में चार अलग doubly shadowed craters के तल के नीचे भूमिगत जल-बर्फ की संभावित उपस्थिति सफलतापूर्वक पुष्टि की गई।
- Faustini Crater की खोज: बड़े Faustini crater matrix (87.39°S, 82.31°E) के भीतर स्थित 1.1 km व्यास के एक छोटे doubly shadowed crater (F2) के अंदर भूमिगत बर्फ के ठोस, concrete साक्ष्य पहचाने गए।
- Lobate-Rim आकृति विज्ञान की पुष्टि: 1.1 km crater के चारों ओर एक विशिष्ट, flow-like lobate-rim morphology खोजी गई। यह संरचनात्मक विशेषता सुझाव देती है कि मूल meteor impact ने ठोस भूमिगत बर्फ की एक परत को तोड़ा — impact के दौरान rim को पिघलाकर और स्थानांतरित करके एक अनोखा lobed pattern बनाया।
- अत्यधिक ठंड में संरक्षण का प्रमाण: इन बर्फ signatures को crater के उन आंतरिक क्षेत्रों में mapped किया गया जहां तापमान लगभग 25K (~-248°C) पर स्थिर रहता है — यह साबित करता है कि ये doubly shadowed zones लंबे भूवैज्ञानिक कालखंडों में volatile resources को संरक्षित करने के लिए आदर्श deep-freezer का काम करते हैं।
महत्व
यह खोज कई कारणों से ऐतिहासिक है। पहला, चंद्रमा पर जल-बर्फ की उपस्थिति का अर्थ है कि भविष्य के astronauts को पृथ्वी से पानी नहीं ले जाना होगा — इसे चंद्रमा की सतह से ही निकाला जा सकता है। दूसरा, जल को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में विभाजित करके अंतरिक्ष यान का ईंधन बनाया जा सकता है। तीसरा, भारत के Chandrayaan-2 की यह खोज NASA के Artemis mission और अन्य lunar missions के लिए लैंडिंग site चयन में निर्णायक भूमिका निभाएगी। और सबसे महत्वपूर्ण — यह PRL और ISRO की वैज्ञानिक उत्कृष्टता का एक और प्रमाण है।
स्रोत: ISRO | Physical Research Laboratory (PRL), अहमदाबाद
| Question based on the Topic | |
| Mains question | Prelims Question |
| प्रश्न: Chandrayaan-2 के DFSAR द्वारा चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर जल-बर्फ की खोज के वैज्ञानिक महत्व का परीक्षण कीजिए। यह खोज भविष्य के चंद्र मिशनों और अंतरिक्ष अन्वेषण की दिशा में किस प्रकार योगदान दे सकती है? (250 शब्द | 15 अंक) | Q4. Chandrayaan-2 के Dual Frequency Synthetic Aperture Radar (DFSAR) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. DFSAR चंद्र सतह का अध्ययन करने के लिए तैनात किया गया पहला पूर्णतः polarimetric SAR है। 2. DFSAR जल-बर्फ की पहचान के लिए उच्च CPR (CPR > 1) और उच्च DOP (DOP > 0.5) के संयोजन का उपयोग करता है। 3. Faustini crater के भीतर खोजा गया doubly shadowed crater F2 लगभग 1.1 km व्यास का है। 4. इन बर्फ signatures वाले crater क्षेत्रों में तापमान लगभग 25K (~-248°C) पर स्थिर रहता है। उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं? (a) केवल एक (b) केवल दो (c) केवल तीन (d) सभी चार उत्तर: (c) केवल तीन व्याख्या: कथन 1 सही है — DFSAR पहला पूर्णतः polarimetric SAR है। कथन 2 गलत है — DFSAR वास्तविक जल-बर्फ की पहचान के लिए उच्च CPR (CPR > 1) और अत्यंत कम DOP (DOP < 0.13) के संयोजन का उपयोग करता है। उच्च DOP नहीं — यह values का सबसे खतरनाक twist है। कथन 3 सही है — F2 crater 1.1 km व्यास का है। कथन 4 सही है — 25K (~-248°C) तापमान सही है। |
