राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग (NSC) में नई नियुक्तियां, सांख्यिकीय प्रणाली को मिलेगा मजबूती का आधार

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केंद्र सरकार की नियुक्ति समिति (Appointments Committee of the Cabinet-ACC) ने राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग (National Statistical Commission-NSC) के अध्यक्ष के रूप में डॉ. सैबल चट्टोपाध्याय की नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही सांख्यिकी, डेटा विश्लेषण और संबंधित क्षेत्रों के तीन विशेषज्ञों को आयोग का अंशकालिक सदस्य नियुक्त किया गया है।

यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब विश्वसनीय, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण आंकड़ों की आवश्यकता नीति निर्माण और विकास योजनाओं के लिए पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

क्या है राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग (NSC)?

  • राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग भारत की आधिकारिक सांख्यिकीय प्रणाली का सर्वोच्च सलाहकार निकाय है। इसका उद्देश्य देश में आंकड़ों के संग्रहण, संकलन, विश्लेषण तथा प्रसार की प्रक्रिया को अधिक विश्वसनीय, वैज्ञानिक और पारदर्शी बनाना है।
  • आयोग एक स्वायत्त एवं सशक्त संस्था के रूप में कार्य करता है, जिसका प्रमुख उद्देश्य आधिकारिक आंकड़ों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना तथा सांख्यिकीय प्रणाली को बाहरी प्रभावों से मुक्त रखना है।

गठन की पृष्ठभूमि

  • भारत की सांख्यिकीय प्रणाली की समीक्षा के लिए जनवरी 2000 में डॉ. सी. रंगराजन की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया था। समिति की सिफारिशों के आधार पर भारत सरकार ने 1 जून 2005 को एक कार्यकारी संकल्प (Executive Resolution) के माध्यम से राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग की स्थापना की।
  • आयोग ने 12 जुलाई 2006 से अपना कार्य प्रारंभ किया।

आयोग की संरचना

राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग में—

  • एक अंशकालिक अध्यक्ष (Chairperson)
  • चार अंशकालिक सदस्य (Part-Time Members)

शामिल होते हैं, जिन्हें सांख्यिकी, संचालन अनुसंधान (Operations Research), अर्थशास्त्र एवं कंप्यूटर विज्ञान जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता के आधार पर नियुक्त किया जाता है।

इसके अतिरिक्त—

  • नीति आयोग (NITI Aayog) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) आयोग के पदेन सदस्य (Ex-Officio Member) होते हैं।
  • भारत के मुख्य सांख्यिकीविद् (Chief Statistician of India) आयोग के सचिव के रूप में कार्य करते हैं।

प्रमुख कार्य

  • राष्ट्रीय सांख्यिकीय नीतियों का निर्माणआयोग विभिन्न क्षेत्रों में डेटा संग्रहण, वर्गीकरण, अवधारणाओं और परिभाषाओं के लिए राष्ट्रीय स्तर की नीतियां एवं मानक निर्धारित करता है।
  • गुणवत्ता मानकों की निगरानीयह मुद्रास्फीति (Inflation), औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP), राष्ट्रीय आय (National Income) तथा अन्य सामाजिक-आर्थिक संकेतकों के लिए गुणवत्ता मानक तय करता है।
  • समन्वय स्थापित करनाआयोग केंद्र सरकार के मंत्रालयों, राज्य सरकारों तथा केंद्रशासित प्रदेशों के बीच सांख्यिकीय गतिविधियों का समन्वय सुनिश्चित करता है।
  • सांख्यिकीय ऑडिटआंकड़ों के संकलन एवं प्रसंस्करण की पद्धतियों की समीक्षा कर उनकी विश्वसनीयता एवं गुणवत्ता का मूल्यांकन करता है।
  • सांख्यिकीय प्रणाली की समीक्षादेश की सांख्यिकीय व्यवस्था का निरंतर मूल्यांकन करते हुए सुधार संबंधी सुझाव प्रदान करता है।

महत्व

  • किसी भी लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था में सटीक और विश्वसनीय आंकड़े प्रभावी नीति निर्माण की आधारशिला होते हैं। गरीबी, बेरोजगारी, मुद्रास्फीति, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक विकास जैसे क्षेत्रों में सरकारी नीतियां आधिकारिक आंकड़ों पर ही आधारित होती हैं।
  • ऐसे में राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग की भूमिका न केवल आंकड़ों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण है, बल्कि शासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को मजबूत करने में भी अत्यंत आवश्यक है।

निष्कर्ष

राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग में नई नियुक्तियां भारत की सांख्यिकीय प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। विश्वसनीय और गुणवत्तापूर्ण आंकड़ों के माध्यम से आयोग देश में बेहतर नीति निर्माण तथा सुशासन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा।