थोक मूल्य सूचकांक (WPI) का आधार वर्ष 2011–12 से बदलकर 2022–23

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पृष्ठभूमि (Background)

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने थोक मूल्य सूचकांक (WPI) के आधार वर्ष को 2011–12 से बदलकर 2022–23 करने की घोषणा की है। इसके साथ ही WPI को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करते हुए उत्पादक मूल्य सूचकांक (Producer Price Index — PPI) को भारत का प्राथमिक मुद्रास्फीति मापक बनाने की दिशा में कदम उठाए गए हैं।

WPI क्या है और संशोधन क्यों जरूरी था? (Why Revision?)

  • WPI भारत में थोक स्तर पर वस्तुओं की कीमतों में बदलाव मापने का प्रमुख सूचकांक है।
  • 2011–12 का आधार वर्ष अत्यंत पुराना हो चुका था और वर्तमान औद्योगिक संरचना, हरित ऊर्जा क्षेत्र तथा नई वस्तुओं को उचित प्रतिनिधित्व नहीं दे पा रहा था।
  • इस संशोधन का उद्देश्य मूल्य निर्धारण डेटा को आधुनिक बनाना, पुराने आधार वर्ष की संरचनात्मक विकृतियों को दूर करना और IMF की अनुशंसाओं के अनुरूप डेटा पद्धति को अद्यतन करना है।

संशोधित श्रृंखला की मुख्य विशेषताएँ (Key Features)

  • वस्तु कवरेज का विस्तार: WPI बास्केट में ट्रैक की जाने वाली वस्तुओं की संख्या 697 से बढ़ाकर 957 कर दी गई है, जो आधुनिक औद्योगिक गतिविधियों का व्यापक प्रतिनिधित्व करती है।
  • हरित ऊर्जा का समावेश: पहली बार सौर और पवन ऊर्जा को ‘बिजली’ समूह में शामिल किया गया है। परमाणु ऊर्जा को भी इसमें जोड़ा गया है।
  • ईंधन पुनर्वर्गीकरण: कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस को ‘प्राथमिक वस्तुओं’ से निकालकर ‘ईंधन एवं ऊर्जा’ समूह में स्थानांतरित किया गया है, जिससे सभी प्राथमिक ऊर्जा स्रोत एक ही सांख्यिकीय छत के नीचे आ गए हैं।
  • उत्पादन-केंद्रित भारांक पद्धति: वस्तुओं का भार निर्धारण अब पुरानी ‘नेट ट्रेडेड वैल्यू’ विधि के स्थान पर ‘सकल उत्पादन मूल्य’ (Gross Value of Output — GVO) से किया जाएगा, जो घरेलू उत्पादक के दृष्टिकोण से वस्तुओं के वास्तविक आर्थिक महत्व को बेहतर दर्शाता है।
  • शॉर्ट-टर्म चेन-बेस्ड फॉर्मूलेशन: प्राथमिक सूचकांकों की गणना अब दीर्घकालिक स्थिर सूत्र के बजाय शॉर्ट-टर्म, चेन-आधारित पद्धति से होगी।
  • उन्नत डेटा इम्प्यूटेशन: गायब मूल्य डेटा को संभालने के लिए ‘टार्गेटेड मीन इम्प्यूटेशन’ पद्धति अपनाई जाएगी और पुरानी त्रुटिपूर्ण ‘कैरी-फॉरवर्ड’ विधि को पूरी तरह समाप्त किया जाएगा।

PPI का बहु-स्तरीय रोलआउट (Multi-Tiered PPI Rollout)

WPI के साथ-साथ सरकार निम्नलिखित जारी करेगी:

  • आउटपुट PPI (OPPI) और एक प्रायोगिक इनपुट PPI (विनिर्माण क्षेत्र के लिए)।
  • सेवा PPI: सात महत्वपूर्ण सेवा क्षेत्रों को कवर करेगी — बैंकिंग, प्रतिभूति लेनदेन, बीमा, पेंशन फंड प्रबंधन, रेलवे, वायु यात्री परिवहन और दूरसंचार।
  • मूल्य निर्धारण आधार: WPI, आउटपुट PPI और सेवा PPI की गणना ‘बेसिक प्राइस’ (नेट करों और व्यापार/परिवहन मार्जिन को छोड़कर) से होगी, जबकि इनपुट PPI ‘क्रेता मूल्य’ पर आधारित होगी।

महत्व (Significance)

  • यह संशोधन भारत की मूल्य सांख्यिकी को IMF के अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाता है।
  • हरित ऊर्जा का पहली बार समावेश भारत की नेट-जीरो प्रतिबद्धता को सांख्यिकीय मान्यता देता है।
  • WPI से PPI की ओर संक्रमण मुद्रास्फीति के अधिक सटीक और उत्पादन-केंद्रित आकलन को सक्षम करेगा।

UPSC/परीक्षा दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण तथ्य

  • पुराना आधार वर्ष: 2011–12 | नया आधार वर्ष: 2022–23 |
  • मंत्रालय: वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय |
  • पुरानी वस्तु संख्या: 697 | नई वस्तु संख्या: 957 |
  • नई भारांक पद्धति: GVO (Gross Value of Output) |
  • नई इम्प्यूटेशन विधि: Targeted Mean Imputation |
  • सेवा PPI क्षेत्र: 7 |
  • अंतरराष्ट्रीय संरेखण: IMF अनुशंसाओं के अनुसार।

निष्कर्ष (Conclusion)

WPI के आधार वर्ष का यह संशोधन एक दीर्घ-प्रतीक्षित और आवश्यक सुधार है। यह न केवल भारत के मूल्य डेटा को अधिक विश्वसनीय बनाएगा, बल्कि नीति-निर्माताओं, निवेशकों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को अर्थव्यवस्था की सही तस्वीर प्रदान करेगा। WPI से PPI की ओर यह संक्रमण भारत की सांख्यिकीय परिपक्वता का प्रतीक है।