June 3rd Declaration के 79 वर्ष: वह ऐतिहासिक ब्लूप्रिंट जिसने दो राष्ट्रों को जन्म दिया

Mountbatten Plan — 3 जून 1947 का वह दिन जब भारत के विभाजन की रूपरेखा तय हुई

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3 जून 2026 को June 3rd Declaration (जिसे Mountbatten Plan भी कहा जाता है) की 79वीं वर्षगांठ है। 1947 में इसी दिन भारत के अंतिम Viceroy Lord Louis Mountbatten ने वह ऐतिहासिक दस्तावेज जारी किया था जिसने ब्रिटिश भारत के विभाजन की विधि, राजनीतिक तर्क और त्वरित समयरेखा निर्धारित की।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

  • सांप्रदायिक गतिरोध: 1946 के Cabinet Mission Plan के विफल होने के बाद Indian National Congress और Muslim League के बीच संबंध पूरी तरह टूट गए। Muslim League के Direct Action Day (अगस्त 1946) ने Great Calcutta Killings को जन्म दिया जो तेजी से Noakhali, Bihar और Punjab (Amritsar, Rawalpindi) में व्यापक सांप्रदायिक हिंसा में बदल गई।
  • ब्रिटिश दबाव: जब Lord Mountbatten मार्च 1947 में पदभार ग्रहण किया तो ब्रिटिश Prime Minister Clement Attlee ने उन्हें 30 जून 1948 तक सत्ता हस्तांतरण की कड़ी समयसीमा दी।
  • Plan Balkan का त्याग: Mountbatten ने मूल रूप से एक वैकल्पिक Plan Balkan तैयार किया था जो individual provinces को स्वतंत्रता घोषित करने या अपनी assemblies चुनने की अनुमति देता। Jawaharlal Nehru ने इसे कड़ाई से अस्वीकार करते हुए तर्क दिया कि यह भारत के पूर्ण विखंडन की ओर ले जाएगा। Pakistan की मांग को अपरिहार्य मानते हुए Mountbatten ने शेष भारत के लिए एक मजबूत, एकीकृत केंद्रीय block को संरक्षित करने के लिए June 3rd Plan तैयार किया।

June 3rd Plan की प्रमुख विशेषताएं

  • विभाजन का सिद्धांत: ब्रिटिश सरकार ने ब्रिटिश भारत के विभाजन के सिद्धांत को आधिकारिक रूप से स्वीकार किया। दो अलग संप्रभु dominions — Dominion of India और Dominion of Pakistan — स्थापित किए जाने थे।
  • प्रांतीय आत्मनिर्णय:
  • बंगाल और पंजाब: इन दो विशाल प्रांतों की Legislative Assemblies को दो खंडों (Muslim-majority और non-Muslim-majority जिले) में विभाजित करके अलग-अलग मतदान कराया गया। यदि किसी खंड में साधारण बहुमत ने विभाजन के पक्ष में मतदान किया तो प्रांत का विभाजन होता।
  • सिंध: Sindh Legislative Assembly को यह चुनाव करने का अधिकार दिया गया कि किस Constituent Assembly में शामिल हों।
  • NWFP और सिलहट: Adult franchise पर आधारित referendums की व्यवस्था की गई। सिलहट ने बाद में East Bengal के साथ विलय के पक्ष में मतदान किया।
  • Boundary Commission: यदि किसी प्रांत का विभाजन होता तो सटीक अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं की mapping के लिए एक स्वतंत्र Boundary Commission की स्थापना की गई — जिसकी अध्यक्षता बाद में Sir Cyril Radcliffe ने की।
  • रजवाड़ों की दुविधा: Plan ने 560 से अधिक Princely States पर से British paramountcy समाप्त की। उन्हें स्वतंत्र रहने का विकल्प नहीं दिया गया — उन्हें geographical contiguity के आधार पर भारतीय या पाकिस्तानी dominion में accede करना था।
  • Independence की त्वरित तिथि: बढ़ती हिंसा के बीच पूर्ण प्रशासनिक पतन को रोकने के लिए Mountbatten ने सत्ता हस्तांतरण की तिथि मूल June 1948 deadline से नाटकीय रूप से आगे बढ़ाकर 15 अगस्त 1947 कर दी।

ऐतिहासिक महत्व और विरोधाभास

June 3rd Declaration का महत्व केवल इसकी तात्कालिक घोषणाओं में नहीं बल्कि उन दीर्घकालिक परिणामों में भी है जो आज तक महसूस किए जाते हैं।

  • Radcliffe Line की त्रासदी: जल्दबाजी में खींची गई सीमाओं के कारण इतिहास का सबसे बड़ा forced migration हुआ — लगभग 1.5 करोड़ लोग विस्थापित हुए और 2-10 लाख लोगों की हिंसा में मृत्यु हुई।
  • Plan Balkan की अस्वीकृति का महत्व: Nehru की दूरदर्शिता ने India को एक unified nation के रूप में बनाए रखा। यदि Plan Balkan लागू होता तो भारत अनेक छोटे-छोटे राज्यों में विखंडित हो जाता।
  • Princely States integration: Sardar Patel की iron hand और Mountbatten Plan के framework ने 560+ रजवाड़ों के integration का रास्ता खोला — जो एक असाधारण कूटनीतिक और राजनीतिक उपलब्धि थी।
  • आज की प्रासंगिकता: 79 वर्ष बाद भी Radcliffe Line पर खींची सीमाएं India-Pakistan संबंधों की कई जटिलताओं की जड़ में हैं। June 3rd Declaration केवल एक ऐतिहासिक दस्तावेज नहीं — यह उस दर्दनाक प्रक्रिया का प्रमाण है जिसमें स्वतंत्रता और विभाजन साथ-साथ आए।

स्रोत: Indian Express | आधुनिक भारतीय इतिहास