June 2020 में लॉन्च — 2025 में पुनर्गठित, 2030 तक विस्तारित — PM Award for Excellence in Public Administration 2023 से सम्मानित
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PM Street Vendor’s AtmaNirbhar Nidhi (PM SVANidhi) योजना के छह वर्ष पूर्ण हो गए हैं। जून 2020 में लॉन्च यह योजना देश के उन करोड़ों रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं के लिए एक transformative initiative साबित हुई है जो अब तक औपचारिक वित्तीय प्रणाली से वंचित थे। इन छह वर्षों में यह योजना न केवल एक ऋण कार्यक्रम बल्कि financial inclusion, digital empowerment और महिला सशक्तिकरण का एक समग्र मंच बन गई है।
PM SVANidhi के बारे में
- मंत्रालय: आवास एवं शहरी मामलों का मंत्रालय (MoHUA)।
- प्रकार: केंद्रीय क्षेत्र योजना।
- अवधि: जून 2020 से 2030 तक। इसे 2025 में पुनर्गठित किया गया और ऋण अवधि को 2024 से बढ़ाकर 31 मार्च 2030 कर दिया गया।
- परिव्यय: ₹7,332 करोड़।
- कार्यान्वयन: MoHUA और वित्तीय सेवा विभाग (DFS) द्वारा संयुक्त रूप से।
छह वर्षों की प्रमुख उपलब्धियां
- ऋण सहायता: लगभग 1 करोड़ ऋण सुगम बनाए गए और बिना collateral के ₹17,800 करोड़ से अधिक वितरित किए गए। यह उन विक्रेताओं के लिए ऐतिहासिक है जो पहले साहूकारों पर निर्भर थे।
- लाभार्थी कवरेज: 75.5 लाख से अधिक रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को औपचारिक वित्त तक पहुंच प्रदान करके सशक्त किया गया। योजना ने लाभार्थियों की औसत आय में 20% वार्षिक वृद्धि दर्ज की है।
- महिला सशक्तिकरण: 34.81 लाख महिला रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को लक्षित वित्तीय सहायता से लाभान्वित किया गया — जो योजना की gender-sensitive implementation को दर्शाता है।
- डिजिटल समावेशन: 55 लाख से अधिक रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को डिजिटल रूप से onboarded किया गया — cashless transactions को बढ़ावा देकर उन्हें digital economy की मुख्यधारा से जोड़ा गया।
- पुरस्कार: योजना को नवाचार (केंद्रीय स्तर) के लिए Prime Minister’s Award for Excellence in Public Administration 2023 से सम्मानित किया गया।
योजना का उद्देश्य
PM SVANidhi का मूल उद्देश्य रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं की कमजोरियों को तीन स्तरों पर संबोधित करना है — औपचारिक ऋण तक पहुंच, डिजिटल भुगतान में शामिल करना और सामाजिक सुरक्षा का विस्तार। COVID-19 महामारी के दौरान जब इस वर्ग की आजीविका सबसे अधिक प्रभावित हुई थी, ठीक उसी समय इस योजना का लॉन्च इसे और भी महत्वपूर्ण बनाता है।
महत्व
- Financial Inclusion का व्यावहारिक मॉडल: PM SVANidhi ने सिद्ध किया कि collateral-free micro-credit असंगठित क्षेत्र में genuine economic mobility ला सकता है। 20% वार्षिक आय वृद्धि इसका ठोस प्रमाण है।
- डिजिटल India का जमीनी रूप: 55 लाख विक्रेताओं का डिजिटल onboarding UPI और cashless economy को समाज के सबसे निचले स्तर तक ले जाने का व्यावहारिक उदाहरण है।
- शहरी गरीबी उन्मूलन: यह योजना शहरी अनौपचारिक अर्थव्यवस्था को formal banking system से जोड़ने का एक सेतु है — जो SDG 1 (No Poverty) और SDG 8 (Decent Work) दोनों के अनुरूप है।
- 2030 तक विस्तार का संदेश: योजना को 2025 में पुनर्गठित कर 2030 तक विस्तारित करना सरकार की इस प्रतिबद्धता का संकेत है कि रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं का financial empowerment एक दीर्घकालिक राष्ट्रीय प्राथमिकता है।
स्रोत: DD News | आवास एवं शहरी मामलों का मंत्रालय | वित्तीय सेवा विभाग
