Abraham Accords: पश्चिम एशिया में शांति की नई इबारत — ट्रम्प का बड़ा दांव

अमेरिकी राष्ट्रपति ने सऊदी अरब, पाकिस्तान, तुर्की समेत कई मुस्लिम देशों को एक साथ Abraham Accords पर हस्ताक्षर करने का आह्वान किया

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अमेरिकी राष्ट्रपति ने पश्चिम एशिया की भू-राजनीति को बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए सऊदी अरब, कतर, पाकिस्तान, मिस्र, तुर्की और जॉर्डन सहित कई मुस्लिम-बहुल देशों को एक साथ Abraham Accords पर हस्ताक्षर करने का उच्च-दांव वाला निर्देश जारी किया है। यह कदम इस क्षेत्र में दशकों की पारंपरिक शत्रुता को एक खुले अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के ढांचे में बदलने का प्रयास है।

Abraham Accords क्या हैं?

Abraham Accords अमेरिका द्वारा दलाली किए गए ऐतिहासिक राजनयिक शांति और सामान्यीकरण समझौतों की एक श्रृंखला है जो इज़राइल और मुस्लिम-बहुल देशों के बीच प्रत्यक्ष द्विपक्षीय संबंधों को औपचारिक रूप देकर पश्चिम एशियाई भू-राजनीति को बदलने के लिए डिज़ाइन की गई है।

इन समझौतों का नाम बाइबिल के पितृपुरुष अब्राहम के नाम पर रखा गया है — जो यहूदी और इस्लाम दोनों धर्मों में एक समान पूर्वज माने जाते हैं। यह नामकरण ही इस ढांचे के मूल दर्शन को व्यक्त करता है — कि दो परंपराओं की साझी जड़ें शांति का आधार बन सकती हैं।

हस्ताक्षरकर्ताओं की सूची

  • दलाल एवं सूत्रधार: संयुक्त राज्य अमेरिका।
  • केंद्रीय राज्य: इज़राइल।
  • प्रारंभिक 2020 के हस्ताक्षरकर्ता: संयुक्त अरब अमीरात (UAE), बहरीन और मोरक्को।
  • बाद में शामिल हुए: कोसोवो, सूडान, सोमालीलैंड और कजाखस्तान।
  • 2026 के लक्षित नए सदस्य: सऊदी अरब, कतर, पाकिस्तान, तुर्की, मिस्र और जॉर्डन।

Abraham Accords के तीन रणनीतिक उद्देश्य

  • क्षेत्रीय स्थिरता और नियंत्रण: ईरान के क्षेत्रीय प्रभाव और परमाणु पहलों का मुकाबला करने के लिए एक एकीकृत, अमेरिका-समर्थित रक्षात्मक और खुफिया गठबंधन का निर्माण।
  • आर्थिक और तकनीकी एकीकरण: अरब बी डॉलर व्यापार, सुरक्षा सहयोग, रक्षा निर्यात और प्रत्यक्ष वाणिज्यिक साझेदारी के नए रास्ते खोलना।
  • ऐतिहासिक अड़चनों को दरकिनार करना: फिलिस्तीनी राज्य के अनसुलझे मुद्दे को द्विपक्षीय आर्थिक प्रगति से अलग करके अरब जगत में इज़राइल की मान्यता का दायरा बढ़ाना।

प्रमुख संरचनात्मक विशेषताएं

  • पूरी तरह सामान्यीकृत द्विपक्षीय संबंध: इज़राइल और भाग लेने वाले देशों के बीच दूतावास खोलना, राजदूतों का आदान-प्रदान और सीधी व्यावसायिक उड़ानें स्थापित करना अनिवार्य है।
  • रक्षा और खुफिया अंतर-संचालनीयता: गहरे सैन्य सहयोग, early-warning radar data साझाकरण और अरब भागीदार देशों को उच्च-मूल्य इज़राइली रक्षा तकनीक निर्यात को सक्षम बनाता है।
  • अमेरिकी राजनयिक प्रोत्साहन: नए हस्ताक्षरकर्ताओं के लिए वाशिंगटन से रणनीतिक प्रोत्साहन — जैसे उन्नत हथियारों की बिक्री या विशेष संप्रभु मान्यताएं — पिछले प्रोत्साहनों की तर्ज पर।
  • आर्थिक सहयोग ढांचा: स्वच्छ ऊर्जा, कृषि-खाद्य, पर्यटन और डिजिटल सुरक्षा बुनियादी ढांचे में साझा निवेश को बढ़ावा देकर परस्पर जुड़े क्षेत्रीय वित्तीय हितों का निर्माण।

भारत के लिए महत्व

Abraham Accords का विस्तार भारत की विदेश नीति के लिए कई निहितार्थ रखता है। पश्चिम एशिया में भारत के महत्वपूर्ण आर्थिक और रणनीतिक हित हैं — 90 लाख से अधिक भारतीय प्रवासी खाड़ी देशों में हैं और तेल आयात का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आता है। यदि सऊदी अरब और पाकिस्तान जैसे देश Accords पर हस्ताक्षर करते हैं तो इससे क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में बड़ा बदलाव आएगा जिसका भारत की ‘neighbourhood first’ और ‘act west’ नीति पर सीधा प्रभाव पड़ेगा।

स्रोत: The Hindu

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Mains questionPrelims Question
प्रश्न: Abraham Accords पश्चिम एशिया की पारंपरिक भू-राजनीतिक संरचना को किस प्रकार बदल रहे हैं? इन समझौतों के रणनीतिक उद्देश्यों का विश्लेषण करते हुए भारत की विदेश नीति पर इनके संभावित प्रभावों का परीक्षण कीजिए। (250 शब्द | 15 अंक)  Q1. Abraham Accords के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. Abraham Accords का नाम बाइबिल के पितृपुरुष अब्राहम के नाम पर रखा गया है जो यहूदी और इस्लाम दोनों धर्मों में एक समान पूर्वज माने जाते हैं।
2. 2020 में इन Accords के प्रारंभिक हस्ताक्षरकर्ता UAE, बहरीन और जॉर्डन थे।
3. कोसोवो, सूडान, सोमालीलैंड और कजाखस्तान बाद में इस ढांचे में शामिल हुए।
4. Abraham Accords का एक प्रमुख उद्देश्य फिलिस्तीनी राज्य के मुद्दे को द्विपक्षीय आर्थिक प्रगति से अलग करके इज़राइल की मान्यता का विस्तार करना है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
(a) केवल एक
(b) केवल दो
(c) केवल तीन
(d) सभी चार
उत्तर: (c) केवल तीन व्याख्या:
कथन 1 सही है — Abraham नाम का आधार यही है। कथन 2 गलत है — 2020 के प्रारंभिक हस्ताक्षरकर्ता UAE, बहरीन और मोरक्को थे। जॉर्डन 2026 के लक्षित नए सदस्यों में है — यह classic twisted option है। कथन 3 सही है — ये चारों बाद में शामिल हुए। कथन 4 सही है — यह Accords की मूल रणनीतिक संरचना है।