1. सेना प्रमुख उपेंद्र द्विवेदी US Army War College के International Hall of Fame में शामिल
2. नमस्ते योजना (NAMASTE Scheme)
3 . भारत–मिस्र रक्षा सहयोग (Joint Defence Committee Meeting)
4. SAF-मिश्रित विमानन ईंधन (Sustainable Aviation Fuel Blended ATF)
1. सेना प्रमुख उपेंद्र द्विवेदी US Army War College के International Hall of Fame में शामिल
| EXAM RELAVANCE | |
| प्रारंभिक परीक्षा (PT) | मुख्य परीक्षा (MAINS) |
| राष्ट्रीय मह:त्व की समसामयिक घटनाएँ | GS Paper 3 : अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्धएवं समसामयिक घटनाएँ |
| टॉपिक के संभावित मुख्य परीक्षा प्रश्न – 1.अमेरिकी सेना युद्ध महाविद्यालय (US Army War College) के International Hall of Fame में जनरल उपेंद्र द्विवेदी को शामिल किया जाना भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों के संदर्भ में क्यों महत्वपूर्ण है?(150 शब्द) 2.भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग को दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी का प्रमुख स्तंभ क्यों माना जाता है? उदाहरण सहित चर्चा कीजिए।(250 शब्द) | |
संदर्भ (Current Affairs)
भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी को अमेरिका के Carlisle Barracks स्थित US Army War College (AWC) के International Hall of Fame में शामिल किया गया।
वे यह सम्मान पाने वाले तीसरे भारतीय सेना प्रमुख हैं। उनसे पहले:
- जनरल वी.के. सिंह
- जनरल बिक्रम सिंह
US Army War College (AWC)
- स्थान: Carlisle Barracks, Pennsylvania (USA)
- यह अमेरिका का प्रमुख Professional Military Education (PME) संस्थान है।
- उद्देश्य:
- उच्च स्तरीय सैन्य नेतृत्व विकसित करना
- रणनीतिक अध्ययन (Strategic Studies)
- राष्ट्रीय सुरक्षा नीति पर प्रशिक्षण
International Hall of Fame (IHOF) क्या है?
- यह AWC द्वारा दिया जाने वाला एक प्रतिष्ठित सम्मान है।
- यह सम्मान उन अंतरराष्ट्रीय सैन्य अधिकारियों को दिया जाता है जिन्होंने:
- सैन्य क्षेत्र में उत्कृष्ट नेतृत्व दिया हो
- रणनीतिक योगदान किया हो
- अंतरराष्ट्रीय रक्षा सहयोग को बढ़ावा दिया हो
यात्रा से जुड़े प्रमुख तथ्य
- जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने AWC का दौरा किया और:
- फैकल्टी एवं अंतरराष्ट्रीय अधिकारियों को संबोधित किया
- बदलती सुरक्षा चुनौतियों पर विचार साझा किए
- पैनल चर्चाओं और अकादमिक गतिविधियों में भाग लिया
- वे स्वयं AWC के पूर्व छात्र (Alumni) और Distinguished Fellow रहे हैं।
भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग का महत्व (Strategic Significance)
यह घटना भारत-अमेरिका के बढ़ते रक्षा सहयोग को दर्शाती है, जिसमें शामिल हैं:
1. उच्च स्तरीय सैन्य संवाद (High-Level Military Engagement)
- नौसेना और वायु सेना प्रमुखों की हालिया यात्राओं के बाद यह दौरा हुआ।
- इससे दोनों देशों के बीच सैन्य विश्वास बढ़ता है।
2. Indo-Pacific में रणनीतिक साझेदारी
- भारत और अमेरिका का साझा उद्देश्य:
- Free, Open and Prosperous Indo-Pacific
- चीन की बढ़ती आक्रामकता के संदर्भ में इसका महत्व बढ़ गया है।
3. Interoperability में वृद्धि
- संयुक्त अभ्यास, प्रशिक्षण और सैन्य शिक्षा से दोनों सेनाओं के बीच संचालन क्षमता बढ़ती है।
4. Defence Technology Cooperation
- रक्षा उत्पादन, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, और संयुक्त विकास की संभावनाएँ बढ़ती हैं।
Indo-Pacific क्षेत्र में प्रभाव
- Indo-Pacific विश्व व्यापार और समुद्री सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र है।
भारत-अमेरिका सहयोग से
- समुद्री सुरक्षा मजबूत होती है
- आतंकवाद एवं समुद्री अपराधों पर नियंत्रण
- क्षेत्रीय स्थिरता और नियम आधारित व्यवस्था को समर्थन
2. नमस्ते योजना (NAMASTE Scheme)
| EXAM RELAVANCE | |
| प्रारंभिक परीक्षा (PT) | मुख्य परीक्षा (MAINS) |
| राष्ट्रीय मह:त्व की समसामयिक घटनाएँ | GS Paper 2 : सामाजिक न्याय गरिमा एवं मानवाधिकार शहरी स्वच्छता प्रबंधन मैनुअल स्कैवेंजिंग उन्मूलन अनुसूचित जाति वर्ग के अधिकार (क्योंकि अधिकतर श्रमिक सामाजिक रूप से वंचित वर्ग से आते हैं) स्वास्थ्य एवं सुरक्षा सतत विकास लक्ष्य (SDG-6: Clean Water & Sanitation) |
| टॉपिक के संभावित मुख्य परीक्षा प्रश्न – प्रश्न 1:नमस्ते योजना मैनुअल स्कैवेंजिंग समाप्त करने में किस प्रकार सहायक है? इसके समक्ष चुनौतियाँ भी बताइए। (250 शब्द) प्रश्न 2:स्वच्छता कर्मचारियों की गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु सरकारी प्रयासों का मूल्यांकन कीजिए। (250 शब्द) | |
संदर्भ (Current Affairs)
हाल ही में केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री ने बताया कि नमस्ते योजना ने मैनुअल स्कैवेंजिंग (खतरनाक सफाई कार्य) को समाप्त करने तथा स्वच्छता कर्मचारियों की सुरक्षा एवं सम्मान सुनिश्चित करने में मापने योग्य प्रभाव दिखाया है।
नमस्ते योजना क्या है?
- नमस्ते योजना (National Action for Mechanised Sanitation Ecosystem) भारत में सीवर और सेप्टिक टैंक सफाई कर्मचारियों (SSWs) तथा कचरा बीनने वालों (Waste Pickers) की सुरक्षा, स्वास्थ्य और गरिमा सुनिश्चित करने हेतु एक महत्वपूर्ण योजना है।
उद्देश्य (Objectives)
नमस्ते योजना के प्रमुख उद्देश्य हैं:
- खतरनाक मैनुअल सफाई (Hazardous Manual Cleaning) को समाप्त करना
- सीवर/सेप्टिक टैंक सफाई कार्य में शून्य मृत्यु (Zero Fatality) सुनिश्चित करना
- मानव मल के साथ प्रत्यक्ष संपर्क समाप्त करना
- सफाई कार्य को पूरी तरह यंत्रीकृत (Mechanised) बनाना
- श्रमिकों को PPE (Personal Protective Equipment) उपलब्ध कराना
- श्रमिकों को कौशल प्रशिक्षण (Skill Training) देना
- श्रमिकों को SHG एवं उद्यमिता के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त बनाना
- Emergency Response Sanitation Units (ERSU) को मजबूत करना
संबंधित मंत्रालय और एजेंसी
कार्यान्वयन मंत्रालय:
- सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय (MoSJE)
- आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA)
🔹कार्यान्वयन एजेंसी:
- राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त विकास निगम (NSKFDC)
(MoSJE के अधीन)
अवधि (Duration)
- वित्त वर्ष 2023-24 से 2025-26 तक
- कुल अवधि: 3 वर्ष
लक्षित समूह (Target Beneficiaries)
- शहरी क्षेत्रों में:
- सीवर एवं सेप्टिक टैंक सफाई कर्मचारी (SSWs)
- कचरा बीनने वाले (Waste Pickers)
योजना के प्रमुख घटक
- सीवर सफाई के लिए मशीनों का उपयोग
- सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता
- स्वास्थ्य बीमा एवं सुरक्षा उपाय
- कौशल विकास एवं प्रशिक्षण
- उद्यमिता सहायता एवं वित्तीय सहयोग (NSKFDC के माध्यम से)
- आपातकालीन प्रतिक्रिया इकाइयों की स्थापना
चुनौतियाँ
- नगर निकायों में मशीनों की कमी
- PPE का नियमित उपयोग नहीं होना
- ठेकेदारी प्रणाली में श्रमिकों का शोषण
- जागरूकता एवं प्रशिक्षण की कमी
- सीवर मृत्यु की घटनाओं पर कमजोर जवाबदेही
आगे की राह (Way Forward)
- सभी ULBs में यंत्रीकृत उपकरणों की उपलब्धता
- PPE उपयोग को अनिवार्य करना
- नगर निकायों की जवाबदेही तय करना
- श्रमिकों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण
- ERSU को हर शहर में सक्रिय बनाना
- मैनुअल स्कैवेंजिंग कानूनों का सख्त पालन
निष्कर्ष (Conclusion)
- नमस्ते योजना भारत में स्वच्छता कर्मचारियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और सम्मान सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
- यदि इसे प्रभावी रूप से लागू किया जाए, तो यह मैनुअल स्कैवेंजिंग जैसी अमानवीय प्रथा को समाप्त करने में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।
3 . भारत–मिस्र रक्षा सहयोग (Joint Defence Committee Meeting)
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| प्रारंभिक परीक्षा (PT) | मुख्य परीक्षा (MAINS) |
| राष्ट्रीय मह:त्व की समसामयिक घटनाएँ भारत एवं विश्व का भूगोल(Mapping) | GS Paper 1 : भारत एवं विश्व का भूगोल GS Paper 3 : अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध |
| टॉपिक के संभावित मुख्य परीक्षा प्रश्न – प्रश्न:भारत–मिस्र रक्षा सहयोग भारत की विदेश नीति और क्षेत्रीय सुरक्षा में कार सहायक हो सकता है? विवेचना कीजिए। (250 शब्द) | |
संदर्भ (Current Affairs)
- हाल ही में काहिरा (Cairo) में आयोजित 11वीं संयुक्त रक्षा समिति (Joint Defence Committee – JDC) की बैठक में भारत और मिस्र ने द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा की।
भारत–मिस्र रक्षा सहयोग का महत्व
भारत और मिस्र के बीच रक्षा सहयोग निम्न कारणों से महत्वपूर्ण है:
1. रणनीतिक स्थिति (Strategic Location)
मिस्र सुएज़ नहर (Suez Canal) के कारण वैश्विक व्यापार और समुद्री मार्गों में अत्यंत महत्वपूर्ण देश है।
यह यूरोप, एशिया और अफ्रीका के बीच एक मुख्य भू-राजनीतिक कड़ी है।
2. Indo-Pacific और West Asia Link
भारत की Look West / Link West Policy में मिस्र की भूमिका बढ़ रही है।
यह भारत की West Asia तथा Africa Outreach रणनीति में सहायक है।
3. रक्षा व्यापार और सैन्य सहयोग
संयुक्त सैन्य अभ्यास, प्रशिक्षण, रक्षा उपकरणों के आदान-प्रदान और तकनीकी सहयोग की संभावना।
आतंकवाद और कट्टरपंथ से निपटने में सहयोग।
4. बहुध्रुवीय विश्व में सहयोग
भारत और मिस्र दोनों Global South की प्रमुख आवाज़ हैं।
यह सहयोग बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को समर्थन देता है।
मिस्र (Egypt)
मिस्र एक अंतरमहाद्वीपीय (Transcontinental) देश है।
यह उत्तर-पूर्वी अफ्रीका और दक्षिण-पश्चिमी एशिया में फैला हुआ है।
सिनाई प्रायद्वीप (Sinai Peninsula): यह अफ्रीका और एशिया के बीच भूमि सेतु (Land Bridge) का कार्य करता है।
मिस्र की सीमाएँ (Borders): मिस्र की भूमि सीमा निम्न देशों से लगती है:
- दक्षिण: सूडान (Sudan)
- पश्चिम: लीबिया (Libya)
- उत्तर-पूर्व: इज़राइल (Israel) और गाजा पट्टी (Gaza Strip)
प्रमुख जल निकाय (Water Bodies)
- उत्तर: भूमध्य सागर (Mediterranean Sea)
- पूर्व: लाल सागर (Red Sea)
- अकाबा की खाड़ी (Gulf of Aqaba)
राजधानी: काहिरा (Cairo)
जलवायु एवं भू-आकृति (Climate & Relief)
जलवायु: मुख्यतः उष्णकटिबंधीय एवं शुष्क (Hot and Dry Desert Climate)
भूभाग (Relief): मिस्र की स्थलाकृति में दो प्रमुख क्षेत्र
- विशाल रेगिस्तान क्षेत्र
- उपजाऊ नील नदी घाटी (Nile River Valley)
देश का लगभग दो-तिहाई भाग पश्चिमी रेगिस्तान (Western Desert) से ढका है।
नील नदी (Nile River) :नील नदी दुनिया की सबसे लंबी नदियों में से एक है। यह मिस्र में दक्षिण से उत्तर की ओर बहती है। मिस्र की कृषि और जनसंख्या का अधिकांश भाग नील घाटी के आसपास केंद्रित है।
सबसे ऊँचा शिखर:माउंट कैथरीन (Mount Catherine) ऊँचाई: 2,642 मीटर
प्राकृतिक संसाधन (Natural Resources):पेट्रोलियम (Petroleum) प्राकृतिक गैस (Natural Gas) फॉस्फेट (Phosphate) और लौह अयस्क (Iron Ore)
निष्कर्ष
- भारत और मिस्र का रक्षा सहयोग केवल द्विपक्षीय संबंधों को ही नहीं, बल्कि पश्चिम एशिया–अफ्रीका क्षेत्र में भारत की रणनीतिक भूमिका को भी मजबूत करता है।
- मिस्र की भौगोलिक स्थिति इसे वैश्विक व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री रणनीति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बनाती है।
4. SAF-मिश्रित विमानन ईंधन (Sustainable Aviation Fuel Blended ATF)
| EXAM RELAVANCE | |
| प्रारंभिक परीक्षा (PT) | मुख्य परीक्षा (MAINS) |
| राष्ट्रीय मह:त्व की समसामयिक घटनाएँ विज्ञानं एवं तकनीक | GS Paper 3 : विज्ञानं एवं तकनीक |
| टॉपिक के संभावित मुख्य परीक्षा प्रश्न – प्रश्न: सतत विमानन ईंधन (SAF) भारत के विमानन क्षेत्र में उत्सर्जन घटाने में किस प्रकार सहायक हो सकता है? इससे जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा कीजिए। (250 शब्द) | |
संदर्भ
- भारत सरकार ने विमानन टरबाइन ईंधन (ATF) (विपणन विनियमन) आदेश, 2001 में संशोधन कर SAF-मिश्रित ईंधन को इसके नियामक दायरे में शामिल कर लिया है।
- यह कदम विमानन क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन घटाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
SAF-मिश्रित विमानन ईंधन क्या है?
- SAF (Sustainable Aviation Fuel) को पारंपरिक ATF (Aviation Turbine Fuel) में मिलाकर बनाया गया ईंधन SAF-मिश्रित विमानन ईंधन कहलाता है।
- इसे “ड्रॉप-इन फ्यूल” कहा जाता है क्योंकि:
- इसे मौजूदा विमान इंजन और ईंधन प्रणाली में बिना बदलाव के इस्तेमाल किया जा सकता है।
- किसी नए इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता नहीं होती।
संरचना और प्रकृति
रासायनिक समानता
- SAF में ऐसे एविएशन-ग्रेड हाइड्रोकार्बन होते हैं जो रासायनिक रूप से पेट्रोलियम आधारित ATF जैसे होते हैं।
संगतता (Compatibility)
- यह मौजूदा विमानों के इंजनों और ईंधन प्रणालियों के साथ पूरी तरह संगत है।
फीडस्टॉक (Feedstock)
SAF एक नवीकरणीय ईंधन है, जो प्राप्त होता है:
- फसल आधारित स्रोतों से
- जैविक अवशेषों से
- कृषि अपशिष्ट
- नगर ठोस कचरा
- औद्योगिक अपशिष्ट
- प्रयुक्त खाद्य तेल (Used Cooking Oil) आदि से
मानक एवं अंतरराष्ट्रीय मान्यता
- SAF को उपयोग से पहले:
- ICAO (International Civil Aviation Organization) द्वारा मान्यता प्राप्त परीक्षण प्रक्रिया से गुजरना होता है।
- ASTM International Standards को पूरा करना होता है।
शासन एवं विनियमन
नियामक आदेश
- SAF-मिश्रित ईंधन अब ATF (Marketing Regulation) Order, 2001 के अंतर्गत आता है।
भारतीय मानक (BIS Standards)
- IS 1571 → पेट्रोलियम आधारित ATF एवं सह-संसाधित SAF के लिए मानक
- IS 17081 → ATF के साथ मिश्रित SAF के लिए विशिष्ट मानक
CORSIA से संबंध
- अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में उपयोग हेतु SAF को CORSIA (Carbon Offsetting and Reduction Scheme for International Aviation) की स्थिरता शर्तों को पूरा करना होगा।
- तभी इसे CORSIA-Eligible Fuel (CEF) माना जाएगा।
SAF-मिश्रित ईंधन की प्रमुख विशेषताएँ
उत्सर्जन में कमी
- पारंपरिक जीवाश्म ईंधन की तुलना में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी करता है।
प्रदर्शन में समानता
- ईंधन की सुरक्षा, क्षमता और इंजन प्रदर्शन में कोई मूलभूत परिवर्तन नहीं होता।
वैश्विक संरेखण
- SAF, ICAO की CORSIA योजना का प्रमुख हिस्सा है।
- CORSIA के तहत 2027 से अनिवार्य चरण शुरू होगा, जिसमें अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को उत्सर्जन की भरपाई करनी होगी।
अप्रैल 2026 संशोधन के प्रमुख बदलाव
परिभाषा का विस्तार
पहले ATF केवल पेट्रोलियम आधारित माना जाता था।
अब इसमें शामिल हैं:
- रिफाइनरी में सह-संसाधित SAF
- ATF के साथ मिश्रित SAF
सरकार को नियंत्रण अधिकार
अब सरकार SAF की:
- आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain)
- विपणन (Marketing)
- वितरण व्यवस्था
को बेहतर तरीके से नियंत्रित कर सकती है।
मिश्रण लक्ष्य (Indicative Blending Targets)
सरकार ने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए लक्ष्य तय किए हैं:
- 2027: 1% मिश्रण
- 2028: 2% मिश्रण
- 2030: 5% मिश्रण
भारत के लिए महत्व
कार्बन क्रेडिट लागत में कमी
- भारतीय एयरलाइंस को CORSIA के तहत कार्बन ऑफसेटिंग के लिए क्रेडिट खरीदने की जरूरत कम होगी।
वैश्विक प्रतिस्पर्धा में लाभ
- भारत EU, UK, Singapore जैसे देशों के साथ तालमेल बनाए रखेगा जहाँ SAF अनिवार्यता पहले से लागू है।
घरेलू उत्पादन को बढ़ावा
- रिफाइनरियों में SAF उत्पादन बढ़ेगा।
- इससे Make in India और ऊर्जा सुरक्षा को बल मिलेगा।
जलवायु लक्ष्य (Climate Commitments)
- भारत के Net Zero 2070 लक्ष्य और NDC commitments को समर्थन मिलेगा।
चुनौतियाँ (Challenges)
- SAF की लागत अभी पारंपरिक ATF से अधिक है।
- उत्पादन क्षमता सीमित है।
- फीडस्टॉक उपलब्धता और लॉजिस्टिक्स चुनौतीपूर्ण।
- मानकीकरण एवं प्रमाणन प्रक्रिया जटिल।
आगे की राह (Way Forward)
- घरेलू SAF उत्पादन हेतु निवेश बढ़ाना
- फीडस्टॉक आपूर्ति श्रृंखला मजबूत करना
- कर प्रोत्साहन एवं सब्सिडी मॉडल
- निजी क्षेत्र की भागीदारी
- एयरलाइंस के लिए दीर्घकालिक नीति रोडमैप
निष्कर्ष (Conclusion)
- SAF-मिश्रित विमानन ईंधन भारत के लिए विमानन क्षेत्र में ग्रीन ट्रांजिशन की दिशा में एक बड़ा कदम है।
- उचित नीति समर्थन और उत्पादन विस्तार के माध्यम से यह भारत को जलवायु प्रतिबद्धताओं, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूत बना सकता है।
