आईएनएस निरीक्षक (INS Nireekshak)
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| टॉपिक के संभावित मुख्य परीक्षा प्रश्न – 1. “पनडुब्बी बचाव क्षमता (Submarine Rescue Capability) किसी भी ब्लू-वॉटर नौसेना के लिए आवश्यक है।” INS निरीक्षक के संदर्भ में विवेचना कीजिए। (250 शब्द) | |
संदर्भ (Current Affairs)
- भारतीय नौसेना का जहाज INS Nireekshak हाल ही में भारत–श्रीलंका गोताखोरी अभ्यास (DIVEX 2026) के चौथे संस्करण में भाग लेने हेतु कोलंबो (Sri Lanka) पहुँचा।
INS निरीक्षक (INS Nireekshak)
- INS निरीक्षक भारतीय नौसेना का एक विशेष पोत (Special Ship) है।
- यह एक गोताखोरी सहायता पोत (Diving Support Vessel – DSV) तथा पनडुब्बी बचाव पोत (Submarine Rescue Vessel) है।
इसका उपयोग मुख्यतः निम्न कार्यों में किया जाता है:
- पनडुब्बी बचाव कार्य (Submarine Rescue)
- गहरे समुद्र में गोताखोरी अभियान
- पानी के नीचे मरम्मत एवं निरीक्षण (Underwater Repair/Inspection)
- खोज एवं बचाव अभियान (Search and Rescue Operations)
- गोताखोरों का प्रशिक्षण (Divers Training)
निर्माण एवं कमीशनिंग
INS निरीक्षक का निर्माण मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) द्वारा 1985 में किया गया।
- यह 1989 से नौसेना सेवा में कार्यरत है।
- इसे 1995 में औपचारिक रूप से कमीशन (Commission) किया गया।
प्रमुख तकनीकी विशेषताएँ
INS निरीक्षक निम्न आधुनिक प्रणालियों से सुसज्जित है:
1. उन्नत गहरे समुद्र गोताखोरी प्रणाली (Advanced Deep Sea Diving Systems)
- यह अत्यधिक गहराई में गोताखोरी को संभव बनाती है।
2. पुनःदाबन कक्ष (Recompression Chamber)
- यह गोताखोरों को डिकंप्रेशन सिकनेस (Decompression Sickness / Bends) से बचाने में उपयोगी होता है।
3. पनडुब्बी बचाव अवसंरचना (Submarine Rescue Infrastructure)
- यह दुर्घटनाग्रस्त पनडुब्बी में फँसे कर्मियों को बचाने हेतु आवश्यक तकनीकी सुविधा प्रदान करता है।
4. गहरे जलमग्न बचाव वाहन की तैनाती (DSRV Deployment)
- यह जहाज गहरे जलमग्न बचाव वाहन (Deep Submergence Rescue Vehicle – DSRV) को तैनात करने में सक्षम है।
- DSRV का उपयोग पनडुब्बी के अंदर फँसे लोगों को बाहर निकालने के लिए किया जाता है।
5. संतृप्ति गोताखोरी सहायता (Saturation Diving Support)
- संतृप्ति गोताखोरी का अर्थ है गोताखोरों को लंबे समय तक समुद्र की गहराई में काम करने हेतु विशेष दबाव की स्थिति में रखना।
रणनीतिक महत्व
INS निरीक्षक जैसे जहाज भारत की समुद्री सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि:
- यह पनडुब्बी दुर्घटनाओं के समय त्वरित बचाव सहायता प्रदान करता है।
- यह भारतीय नौसेना की पानी के नीचे युद्ध क्षमता (Underwater Warfare Capability) को मजबूत करता है।
- यह हिंद महासागर क्षेत्र (Indian Ocean Region – IOR) में भारत की मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR) भूमिका को सुदृढ़ करता है।
- यह भारत की ब्लू वाटर नेवी (Blue Water Navy) क्षमता को समर्थन देता है।