Table of Content
1.प्रज्ञा प्रणाली (Prajna System)
2. भारत–जापान AI रणनीतिक वार्ता
3. “खाड़ी संकट और उर्वरक सुरक्षा: भारत के लिए नई चुनौती”
4. द्रुज़्बा पाइपलाइन (Druzhba Pipeline)
5. “भारत-श्रीलंका DIVEX 2026: कोलंबो में द्विपक्षीय गोताखोरी अभ्यास
1.प्रज्ञा प्रणाली (Prajna System)
| EXAM RELAVANCE | |
| प्रारंभिक परीक्षा (PT) | मुख्य परीक्षा (MAINS) |
| राष्ट्रीय मह:त्व की समसामयिक घटनाएँ | GS Paper 3: आंतरिक सुरक्षा |
| टॉपिक के संभावित मुख्य परीक्षा प्रश्न – प्रज्ञा प्रणाली क्या है? इसकी प्रमुख विशेषताओं एवं उद्देश्यों की चर्चा कीजिए। (150 शब्द)आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने में AI-सक्षम उपग्रह इमेजिंग प्रणालियों की भूमिका का विश्लेषण कीजिए। (250 शब्द) प्रज्ञा प्रणाली के संबंध में निम्न कथनों पर विचार कीजिए:यह एक AI-सक्षम उपग्रह इमेजिंग आधारित सुरक्षा प्रणाली है।इसे ISRO द्वारा विकसित किया गया है।इसका उद्देश्य सुरक्षा एजेंसियों को रियल टाइम निर्णय सहायता प्रदान करना है। कौन-सा/से कथन सही है/हैं? A) केवल 1 और 2 B) केवल 1 और 3 C) केवल 2 और 3 D) 1, 2 और 3 | |
संदर्भ
- केंद्रीय गृह मंत्रालय को हाल ही में स्वदेशी AI-सक्षम उपग्रह इमेजिंग प्रणाली ‘प्रज्ञा’ प्राप्त हुई है।
- यह भारत की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
प्रज्ञा प्रणाली क्या है? (Prajna System)
- प्रज्ञा एक स्वदेशी उपग्रह इमेजिंग आधारित सुरक्षा प्रणाली है।
- यह उपग्रह चित्रों (Satellite Imagery) का उपयोग करके रियल टाइम निगरानी और निर्णय सहायता प्रदान करती है।
- इसका मुख्य उद्देश्य सुरक्षा एजेंसियों को सटीक और त्वरित इनपुट देना है।
विकास/निर्माता
- इसे डीआरडीओ के अंतर्गत कृत्रिम बुद्धिमत्ता और रोबोटिक्स केंद्र (CAIR) द्वारा विकसित किया गया है।
- यह प्रणाली भारत की स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकी क्षमता को दर्शाती है।
उद्देश्य (Objectives)
- संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी करना।
- आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करना।
- आतंकवाद विरोधी अभियानों में सहायता करना।
- सुरक्षा एजेंसियों के लिए Real-time Decision Making को आसान बनाना।
कार्यप्रणाली
यह प्रणाली:
- उपग्रह चित्रों (Satellite Imagery)
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित विश्लेषण (AI-driven Analytics) को एकीकृत करती है।AI की मदद से यह बड़े स्तर के डेटा को तेजी से प्रोसेस कर:
- पैटर्न पहचान (Pattern Recognition)
- गतिविधियों की निगरानी
- असामान्य गतिविधि/विसंगतियाँ (Anomalies) चिन्हित करना
जैसे कार्य करती है।
प्रमुख विशेषताएँ
- AI-सक्षम उपग्रह निगरानी प्रणाली
- वास्तविक समय में उपयोगी खुफिया जानकारी प्रदान करती है।
- विशाल डेटा का तेज विश्लेषण ।
- संदिग्ध गतिविधियों की ऑटोमैटिक पहचान।
- स्थितिजन्य जागरूकता बढ़ाती है।
- सुरक्षा बलों के निर्णय को अधिक सटीक और त्वरित बनाती है।
महत्व
- आतंकवाद, घुसपैठ और सीमा सुरक्षा में उपयोगी।
- आपात स्थितियों में तेज प्रतिक्रिया (Rapid Response) संभव।
- पारंपरिक निगरानी की तुलना में कम समय में अधिक सटीक सूचना।
- रक्षा क्षेत्र में AI आधारित तकनीक को बढ़ावा।
- “आत्मनिर्भर भारत” और स्वदेशी रक्षा उत्पादन के लक्ष्य को समर्थन।
2. भारत–जापान AI रणनीतिक वार्ता
| EXAM RELAVANCE | |
| प्रारंभिक परीक्षा (PT) | मुख्य परीक्षा (MAINS) |
| राष्ट्रीय मह:त्व की समसामयिक घटनाएँ | GS Paper 3: अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध एवं विज्ञानं –तकनीक |
| टॉपिक के संभावित मुख्य परीक्षा प्रश्न – 1.भारत–जापान AI रणनीतिक वार्ता के उद्देश्य और महत्व की चर्चा कीजिए। (150 शब्द) 2.“AI कूटनीति (AI Diplomacy) आने वाले समय में रणनीतिक साझेदारी का प्रमुख आधार बनेगी।” भारत–जापान सहयोग के संदर्भ में विश्लेषण कीजिए। (250 शब्द) 3.भारत और जापान के बीच AI सहयोग किन क्षेत्रों में भारत के डिजिटल विकास को गति दे सकता है? स्पष्ट कीजिए। (250 शब्द) | |
संदर्भ (Context)
- भारत और जापान ने मुंबई में पहली बार Artificial Intelligence (AI) Strategic Dialogue आयोजित किया।
- उद्देश्य: उभरती प्रौद्योगिकियों एवं डिजिटल नवाचार में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाना।
प्रमुख प्रतिभागी (Key Participants)
- सह-अध्यक्षता:
- भारत: अमित ए. शुक्ला (JS, Cyber Diplomacy, MEA)
- जापान: हानादा ताकाहिरो (Deputy Assistant Minister, Cyber Security)
- दोनों देशों के मंत्रालयों, एजेंसियों के अधिकारी और AI उद्योग प्रतिनिधि शामिल।
प्रमुख चर्चा क्षेत्र (Key Areas of Discussion)
- AI पारिस्थितिकी तंत्र में सहयोग के अवसर:
- Co-creation (सह-निर्माण)
- Policy Harmonisation (नीतिगत सामंजस्य)
- Industry-oriented AI Solutions का विकास
- भरोसेमंद एवं नवोन्मेषी AI वातावरण बनाने पर फोकस।
पहल का उद्देश्य (Objective of Initiative)
- यह संवाद भारत-जापान AI सहयोग पहल पर आधारित है।
- इसे प्रधानमंत्री मोदी की जापान यात्रा (अगस्त 2025) के दौरान घोषित किया गया था।
- अगले दशक के लिए भारत-जापान संयुक्त दृष्टिकोण का हिस्सा।
सहयोग के प्रमुख क्षेत्र
- एआई पेशेवरों की अंतरराष्ट्रीय गतिशीलता को बढ़ावा देना।
- संयुक्त अनुसंधान (Joint Research) को प्रोत्साहित करना (शिक्षा जगत और उद्योग के सहयोग से)।
- वैश्विक मंचों पर निम्न क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करना:
- एआई शासन (AI Governance)
- नीतिगत ढाँचे (Policy Frameworks)
- नैतिक एआई (Ethical AI)
महत्व (Significance)
- भारत-जापान रणनीतिक साझेदारी को डिजिटल और टेक्नोलॉजी डोमेन में मजबूती।
- हिन्द प्रशांत क्षेत्र में विश्वसनीय तकनिकी साझेदारी को बढ़ावा।
- भारत के लिए:
- एआई कौशल विकास
- नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र
- सुरक्षित डिजिटल शासन
में सहायता।
- वैश्विक AI नियमों में भारत की भूमिका बढ़ाने का अवसर।
निष्कर्ष (Conclusion)
- दोनों देशों ने AI क्षेत्र में आने वाली चुनौतियों और अवसरों का संयुक्त रूप से सामना करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
- अगले दौर की वार्ता जापान में आयोजित करने पर सहमति बनी।
3. “खाड़ी संकट और उर्वरक सुरक्षा: भारत के लिए नई चुनौती”
| EXAM RELAVANCE | |
| प्रारंभिक परीक्षा (PT) | मुख्य परीक्षा (MAINS) |
| राष्ट्रीय मह:त्व की समसामयिक घटनाएँ | GS Paper 3: अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध एवं विज्ञानं –तकनीक |
| टॉपिक के संभावित मुख्य परीक्षा प्रश्न – होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान भारत की उर्वरक आपूर्ति और कृषि अर्थव्यवस्था को किस प्रकार प्रभावित करता है? विश्लेषण कीजिए। (250 शब्द)“भारत की उर्वरक सुरक्षा ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी हुई है।” इस कथन की विवेचना कीजिए। (250 शब्द)ईरान-इजराइल संघर्ष के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने से भारत के खरीफ सीजन पर क्या प्रभाव पड़ सकता है? चर्चा कीजिए। (150/250 शब्द)भारत की उर्वरक आयात निर्भरता के कारण उत्पन्न चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए तथा समाधान सुझाइए। (250 शब्द) | |
संदर्भ (Context)
- अमेरिका–इजराइल–ईरान संघर्ष तथा होर्मुज जलडमरूमध्य में अवरोध के कारण वैश्विक ऊर्जा और व्यापार आपूर्ति बाधित हुई है।
- इससे भारत में उर्वरकों की कीमतों में तीव्र वृद्धि हुई है।
- यूरिया आयात कीमतें 508–512 डॉलर/टन से बढ़कर 935–959 डॉलर/टन तक पहुँच गईं।
प्रमुख उर्वरकों व कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि
- DAP: 680–720 डॉलर/टन → 865–925 डॉलर/टन
- Sulphur: 300–550 डॉलर/टन → 900 डॉलर/टन
- Ammonia: 435 डॉलर/टन → 850–900 डॉलर/टन
- परिणाम: तैयार उर्वरक तथा कच्चे माल दोनों महंगे, जिससे कुल लागत बढ़ी।
आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान
- होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से समुद्री शिपमेंट बाधित।
- कतर एनर्जी और मादेन जैसी कंपनियों की सुविधाएँ प्रभावित होने से आपूर्ति घट गई।
- भारत अब इंडोनेशिया, मलेशिया, मोरक्को, जॉर्डन से वैकल्पिक खरीद कर रहा है।
- सीमित आपूर्ति के लिए वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ने से कीमतें और बढ़ रही हैं।
खरीफ सीजन में उर्वरक चुनौती
- खरीफ (जून से) में मांग बढ़ती है, विशेषकर यूरिया की।
- अनुमानित खरीफ आवश्यकता: 19.4 मिलियन टन
- उपलब्ध स्टॉक (अप्रैल): 5.5 मिलियन टन
- इससे बुवाई के समय गंभीर कमी की आशंका है।
आयात निर्भरता और खाड़ी क्षेत्र का महत्व
- वार्षिक यूरिया खपत: 39–40 मिलियन टन
- घरेलू उत्पादन: 30–31
- आयात: 9–10
- युद्ध से पहले लगभग 40% आयात GCC देशों से आता था।
- यूरिया उत्पादन हेतु आवश्यक LNG का 60%+ हिस्सा खाड़ी से आता है।
- इसलिए खाड़ी क्षेत्र में व्यवधान आयात और घरेलू उत्पादन दोनों को प्रभावित करता है।
घरेलू उत्पादन व रसद समस्याएँ
- LNG कमी से उत्पादन घटा (मार्च में 1.5 मिलियन टन)।
- फारस की खाड़ी में जहाज फँसने से माल ढुलाई में देरी।
- लोडिंग समय सीमा बढ़ने से आपूर्ति संकट और गहरा।
समाधान: विकल्प व नीतिगत उपाय
- उर्वरक उपयोग विविधीकरण: TSP, MAP, SSP का अधिक प्रयोग।
- फोर्टिफाइड उर्वरक: यूरिया/DAP में जिंक, आयरन, बोरॉन, सल्फर आदि मिलाना।
- बायोस्टिमुलेंट्स को बढ़ावा (सूक्ष्मजीव/समुद्री शैवाल आधारित)।
- पोषक तत्व उपयोग दक्षता बढ़ाकर कुल खपत घटाना।
- दीर्घकाल में आयात निर्भरता घटाने हेतु घरेलू उत्पादन क्षमता व LNG सुरक्षा बढ़ाना।
निष्कर्ष
- यह संकट भारत को उर्वरक नीति में विविधीकरण, नवाचार और दक्षता की ओर ले जा सकता है।
- फोर्टिफाइड उर्वरक, बायोस्टिमुलेंट और बेहतर पोषक प्रबंधन अपनाकर भारत कृषि उत्पादकता बनाए रखते हुए आयात निर्भरता कम कर सकता है।
4. द्रुज़्बा पाइपलाइन (Druzhba Pipeline)
| EXAM RELAVANCE | |
| प्रारंभिक परीक्षा (PT) | मुख्य परीक्षा (MAINS) |
| राष्ट्रीय मह:त्व की समसामयिक घटनाएँ | GS Paper 3: अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध एवं वैश्विक उर्जा संकट |
| टॉपिक के संभावित मुख्य परीक्षा प्रश्न – द्रुज़्बा पाइपलाइन क्या है? यूरोप की ऊर्जा सुरक्षा में इसके महत्व की चर्चा कीजिए। (150 शब्द)“ऊर्जा अवसंरचना आज भू-राजनीतिक दबाव और कूटनीति का प्रमुख साधन बन चुकी है।” द्रुज़्बा पाइपलाइन के संदर्भ में विश्लेषण कीजिए। (250 शब्द) प्रश्न : द्रुज़्बा पाइपलाइन के संबंध में निम्न कथनों पर विचार कीजिए: यह पाइपलाइन रूस के अल्मेत्येव्स्क क्षेत्र से शुरू होती है। यह बेलारूस से होकर गुजरती है और मोज़ीर में दो शाखाओं में बंटती है। इसकी उत्तरी शाखा यूक्रेन होकर गुजरती है। कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (A) केवल 1 और 2 (B) केवल 2 और 3 (C) केवल 1 और 3 (D) 1, 2 और 3 | |
संदर्भ (Context)
- द्रुज़्बा पाइपलाइन के यूक्रेनी खंड के माध्यम से रूसी तेल प्रवाह बहाल होने के बाद, हंगरी ने यूक्रेन हेतु EU के 90 अरब यूरो ऋण पर अपना वीटो हटाया।
- यह घटना ऊर्जा आपूर्ति और भू-राजनीति के संबंध को दर्शाती है।
द्रुज़्बा पाइपलाइन क्या है? (What is Druzhba Pipeline?)
- द्रुज़्बा का अर्थ है “मित्रता”।
- यह दुनिया के सबसे बड़े और सबसे लंबे कच्चे तेल (Crude Oil) पाइपलाइन नेटवर्क में से एक है।
- यह रूस को मध्य और पूर्वी यूरोप के कई देशों से जोड़ती है।
- यह यूरोप में रूसी तेल आपूर्ति की एक प्रमुख ऊर्जा धमनी (Energy Artery) है।
स्थापना और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (Origin & History)
- निर्माण: सोवियत संघ द्वारा
- संचालन शुरू: 1964
- उद्देश्य: COMECON (सोशलिस्ट ब्लॉक देशों) को तेल आपूर्ति करना।
मार्ग और शाखाएँ (Route & Branches)
- शुरुआत: अल्मेत्येव्स्क (Almetyevsk), रूस
- इसके बाद यह बेलारूस से होकर गुजरती है।
- बेलारूस के मोज़ीर (Mozyr) में यह दो शाखाओं में विभाजित होती है:
उत्तरी शाखा
- बेलारूस → पोलैंड → जर्मनी
दक्षिणी शाखा
- यूक्रेन → स्लोवाकिया → चेक गणराज्य / हंगरी
उद्देश्य (Purpose)
- रूसी कच्चे तेल को सीधे यूरोपीय रिफाइनरियों तक पहुँचाना।
- समुद्री मार्गों की तुलना में अधिक स्थिर और उच्च क्षमता वाला भूमि आधारित परिवहन मार्ग प्रदान करना।
- भूमि से घिरे (Landlocked) यूरोपीय देशों की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करना।
प्रमुख विशेषताएँ (Key Features)
- नेटवर्क लंबाई: लगभग 4000 किमी
- क्षमता: 1.2–1.4 मिलियन बैरल/दिन
- अधिकतम विस्तार क्षमता: 2 मिलियन बैरल/दिन
- यह कई यूरोपीय औद्योगिक केंद्रों और रिफाइनरियों को तेल सप्लाई करती है।
- इसकी दक्षिणी शाखा यूक्रेन से गुजरने के कारण अधिक संवेदनशील है।
भू-राजनीतिक महत्व (Geopolitical Significance)
- यह पाइपलाइन Energy Security और Political Bargaining Tool बन गई है।
- यूक्रेन और बेलारूस जैसे पारगमन देशों (Transit States) की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- व्यवधान होने पर:
- यूरोप में तेल संकट बढ़ सकता है।
- EU सहायता/प्रतिबंध नीति प्रभावित हो सकती है।
- हंगरी और स्लोवाकिया जैसे देश आज भी इस पाइपलाइन पर निर्भर हैं।
5. “भारत-श्रीलंका DIVEX 2026: कोलंबो में द्विपक्षीय गोताखोरी अभ्यास
| EXAM RELAVANCE | |
| प्रारंभिक परीक्षा (PT) | मुख्य परीक्षा (MAINS) |
| राष्ट्रीय मह:त्व की समसामयिक घटनाएँ | GS Paper 3: अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध एवं वैश्विक रक्षा सहयोग |
| टॉपिक के संभावित मुख्य परीक्षा प्रश्न – DIVEX 2026 अभ्यास का उद्देश्य और भारत–श्रीलंका समुद्री सहयोग में इसके महत्व की चर्चा कीजिए। (150 शब्द)“भारत की SAGAR नीति हिंद महासागर क्षेत्र में सामुद्रिक सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा देती है।” DIVEX 2026 के संदर्भ में विवेचना कीजिए। (250 शब्द)समुद्री सुरक्षा में संयुक्त नौसैनिक अभ्यासों की भूमिका पर चर्चा कीजिए। भारत–श्रीलंका DIVEX अभ्यास के उदाहरण सहित लिखिए। (250 शब्द)मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) अभियानों में नौसेना की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए। (250 शब्द) | |
संदर्भ (Context)
- भारतीय नौसेना का पोत INS Nireekshan द्विपक्षीय गोताखोरी अभ्यास IN-SLN DIVEX 2026 के चौथे संस्करण में भाग लेने हेतु कोलंबो (श्रीलंका) पहुँचा।
- यह अभ्यास भारत और श्रीलंका के बीच समुद्री सहयोग को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
DIVEX 2026 क्या है? (DIVEX)
- IN-SLN DIVEX 2026 एक विशेष द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास है।
- यह मुख्यतः गोताखोरी (Diving) तथा जलमग्न अभियानों (Underwater Operations) पर केंद्रित है।
- इसमें दोनों देशों की विशिष्ट डाइविंग यूनिट्स भाग लेती हैं।
मेजबान और प्रतिभागी
- मेजबान देश: श्रीलंका
- स्थान: कोलंबो
- प्रतिभागी:
- भारतीय नौसेना
- श्रीलंकाई नौसेना
उद्देश्य (Objectives)
- दोनों नौसेनाओं के बीच पानी के भीतर संयुक्त संचालन क्षमता (Underwater Interoperability) बढ़ाना।
- पानी के भीतर:
- खोज एवं बचाव (Search & Rescue)
- राहत अभियान (Relief Operations)
- आपदा प्रतिक्रिया (Disaster Response)
में समन्वय मजबूत करना।
- हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में समुद्री सुरक्षा सहयोग बढ़ाना।
- भारत की SAGAR (Security and Growth for All in the Region) नीति को आगे बढ़ाना।
प्रमुख विशेषताएँ (Key Features)
- 7 दिनों का विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम जिसमें underwater drills और तकनीकी अभ्यास शामिल हैं।
- Underwater salvage एवं rescue operations पर फोकस।
- BHISHM Cubes का हस्तांतरण:
- भारत द्वारा दो BHISHM क्यूब्स (भारत स्वास्थ्य पहल सहयोग हित और मैत्री) सौंपे जा रहे हैं।
- यह आपात चिकित्सा सहायता हेतु उपयोगी है।
- सुरक्षा सहायता:
- भारतीय नौसेना द्वारा श्रीलंका को 9 mm गोला-बारूद के 50,000 राउंड प्रदान किए जा रहे हैं।
- सौहार्द निर्माण:
- खेल प्रतियोगिताएँ, सामाजिक कार्यक्रम और संयुक्त योग सत्र।
- उच्च स्तरीय चर्चा:
- INS Nireekshan के कमांडिंग ऑफिसर और SLN के वरिष्ठ अधिकारी के बीच रणनीतिक वार्ता।
महत्व (Significance)
- यह अभ्यास भारत को First Responder और Preferred Security Partner के रूप में स्थापित करता है।
- दोनों देशों की नौसेनाएँ समुद्र में आपात स्थितियों के लिए अधिक तैयार होती हैं।
- यह अभ्यास:
- समुद्री मार्गों की सुरक्षा
- बंदरगाहों और व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा
- समुद्र के भीतर खतरों (जैसे विस्फोटक/माइंस) की पहचान
में मदद करता है।
- यह Indo-Pacific क्षेत्र में भारत की Neighbourhood First Policy को मजबूती देता है।
