जलवायु संकट से निपटने में बड़ी सफलता: ICAR ने विकसित की स्मार्ट सीड कोटिंग तकनीक

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भारत में जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों के बीच कृषि क्षेत्र को अधिक टिकाऊ और उत्पादक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। हैदराबाद स्थित ICAR–भारतीय तिलहन अनुसंधान संस्थान (ICAR-IIOR) ने एक अभिनव एवं पेटेंट प्राप्त स्मार्ट सीड कोटिंग तकनीक (Smart Seed Coating Technology) विकसित की है, जो फसलों की स्थापना क्षमता बढ़ाने तथा जलवायु संबंधी तनावों से सुरक्षा प्रदान करने में सक्षम है।

क्या है स्मार्ट सीड कोटिंग तकनीक?

  • स्मार्ट सीड कोटिंग तकनीक एक भारतीय पेटेंट प्राप्त, जैव-अवक्रमणीय (Biodegradable) बीज संवर्धन प्लेटफॉर्म है। यह पारंपरिक बीज उपचार तकनीकों की तुलना में अधिक उन्नत है क्योंकि यह बीज को केवल सुरक्षा ही नहीं बल्कि पोषण एवं जैविक सहायता भी प्रदान करती है।
  • इस तकनीक को ICAR-IIOR, हैदराबाद के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित एवं प्रमाणित किया गया है।

उद्देश्य क्या है?

  • इस तकनीक का मुख्य उद्देश्य जलवायु-अनुकूल कृषि (Climate Resilient Agriculture) को बढ़ावा देना, वर्षा आधारित खेती में उत्पादन जोखिम कम करना तथा फसल उत्पादकता बढ़ाना है।
  • यह विशेष रूप से अनियमित मानसून, सूखा, अत्यधिक तापमान, मिट्टी की गुणवत्ता में गिरावट और कीटों के दबाव जैसी चुनौतियों से उभरते पौधों की रक्षा करती है।

यह तकनीक कैसे कार्य करती है?

  • सबसे पहले बीजों पर जैव-अवक्रमणीय बायोपॉलिमर की एक विशेष परत चढ़ाई जाती है। यह परत बीज के चारों ओर एक सुरक्षात्मक कवच का निर्माण करती है।
  • इस कोटिंग में लाभकारी सूक्ष्मजीव, आवश्यक पोषक तत्व, सूक्ष्म पोषक तत्व, पौध संरक्षण एजेंट तथा वृद्धि प्रोत्साहक तत्व शामिल किए जाते हैं।
  • जब बीज मिट्टी में बोया जाता है और उसे नमी प्राप्त होती है, तब यह परत सक्रिय होकर बीज एवं मिट्टी के बीच एक सूक्ष्म अनुकूल वातावरण तैयार करती है। इसके बाद पोषक तत्व और जैविक घटक सीधे जड़ों के आसपास नियंत्रित रूप से उपलब्ध होते हैं, जिससे अंकुरण और जड़ विकास तेजी से होता है।

प्रमुख विशेषताएँ

  • पूर्णतः जैव-अवक्रमणीय बायोपॉलिमर आधारित तकनीक।
  • एक ही कोटिंग में सुरक्षा, पोषण एवं जैविक सहायता की सुविधा।
  • विभिन्न फसलों की आवश्यकता के अनुसार अनुकूलन योग्य।
  • अनाज, मोटा अनाज, दलहन, तिलहन, रेशा फसलें, सब्जियाँ एवं बागवानी फसलों में उपयोगी।
  • मिट्टी और पर्यावरण को नुकसान पहुँचाए बिना प्राकृतिक रूप से विघटित हो जाती है।

परीक्षणों में शानदार परिणाम

  • अखिल भारतीय समन्वित बीज अनुसंधान परियोजना (AICRP-Seed) के अंतर्गत विभिन्न क्षेत्रों में किए गए परीक्षणों में मक्का, चना, कपास, सरसों तथा अरहर जैसी फसलों में 12% से 37% तक अधिक उत्पादन दर्ज किया गया।
  • इन परिणामों ने तकनीक की प्रभावशीलता को प्रमाणित किया है।

किसानों तक कैसे पहुँचेगी तकनीक?

  • ICAR-IIOR ने इस तकनीक के व्यापक प्रसार के लिए राज्य बीज विकास निगमों, किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) तथा निजी बीज कंपनियों के साथ साझेदारी की योजना बनाई है ताकि इसे बड़े पैमाने पर अपनाया जा सके।

क्यों महत्वपूर्ण है यह तकनीक?

  • विशेषज्ञों के अनुसार जलवायु परिवर्तन के दौर में यह तकनीक किसानों को कम लागत में बेहतर अंकुरण, अधिक उत्पादन तथा जोखिम में कमी प्रदान कर सकती है। इससे वर्षा आधारित कृषि क्षेत्रों में खाद्य सुरक्षा और किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।

निष्कर्ष

  • स्मार्ट सीड कोटिंग तकनीक भारतीय कृषि को अधिक टिकाऊ, उत्पादक और जलवायु-अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह नवाचार न केवल किसानों की उत्पादन क्षमता बढ़ा सकता है, बल्कि भविष्य की कृषि चुनौतियों से निपटने में भी अहम भूमिका निभा सकता है।